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चीफ जस्टिस की इनकार वाली चिट्ठी सामने आई

New Delhi, November 24 (ANI): Justice Surya Kant takes oath as the 53rd Chief Justice of India (CJI) in the Ganatantra Mandap at Rashtrapati Bhavan, in New Delhi on Monday. (DPR PMO/ANI Photo)

नई दिल्ली। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने विपक्ष की ओर से मिलने का समय मांगने की चिट्ठी के जवाब में जो चिट्ठी लिखी थी, वह कांग्रेस पार्टी ने जारी कर दी है। हालांकि इससे पहले सुबह में चीफ जस्टिस ने इसके कंटेंट के बारे में बताने से मना कर दिया था और कहा था कि पत्रकारों को विपक्ष से पूछना चाहिए। इस चिट्ठी में चीफ जस्टिस ने कहा कि एसआईआर और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का मामला अदालत में विचाराधीन है इसलिए उनका विपक्षी नेताओं से मिलना मर्यादा के अनुकूल नहीं होगा।

चीफ जस्टिस ने दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर कहा कि ये उनका मुद्दा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं और कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि याचिका दाखिल कर सकता है। विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के स्थापना दिवस कार्यक्रम में चीफ जस्टिस पहुंचे थे, जहां उन्होंने मीडिया के कुछ सवालों का जवाब गिया।

इस बीच, उनकी वह चिट्ठी भी सामने आई, जो उन्होंने रविवार को ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं को मुलाकात से इनकार करने के लिए लिखा था। इसमें उन्होंने कहा कि विपक्ष जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहता है, वे पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में इन पर मीटिंग करना न्यायिक मर्यादा और नैतिकता के खिलाफ होगा। चीफ जस्टिस ने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट को इन मुद्दों पर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। लंबित मामलों पर विचार करने के लिए न्यायिक प्रक्रिया अपनानी होगी।

चीफ जस्टिस ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि संविधान के अनुच्छेद 32 और न्यायिक समीक्षा की शक्तियों के तहत सुप्रीम कोर्ट नागरिकों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करने के लिए बाध्य है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष अगर सोमवार को याचिका दाखिल करे तो उसे मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। नागरिक कानून में तय प्रक्रिया के तहत अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए किसी भी समय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

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