नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने 20 जुलाई के संसद मार्च की तर्ज पर दिल्ली में पांच सितंबर को एक और मार्च निकालने का ऐलान किया है। सीजेपी ने कहा है कि जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार ने जो समझौता किया और जो वादे किए उसे पूरा नहीं किया जा रहा है। सीजेपी ने कहा है कि सरकार के वादे पर भरोसा करके आंदोलन वापस लिया गया था लेकिन सरकार अपना वादा नहीं निभा रही है। आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा हो गया था। लेकिन नीट यूजी पेपर लीक के कारण सुसाइड करने वाले छात्रों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों पर से मुकदमा वापस लेने का वादा नहीं पूरा किया गया है।
बहरहाल, सोमवार को सीजेपी ने अपनी राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक की, जिसमें फैसला किया गया है कि पांच सितंबर को इंडिया गेट से मार्च शुरू होगा, जो नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। इसमें उन छात्रों के परिजन भी शामिल होंगे, जिन्होंने नीट यूजी पेपर लीक के बाद सुसाइड किया था। इससे पहले सीजेपी ने 20 जुलाई को जंतर मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। सोमवार को हुई वर्चुअल मीटिंग के बाद पार्टी ने कहा, ‘सरकार ने कहा था कि छात्रों पर दर्ज केस खत्म होंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। उन्हें हमारे धैर्य को कमजोरी नहीं समझना चाहिए’।
बैठक के बाद सीजेपी नेता सौरव दास और रत्ना सिंह ने कहा कि सरकार को आंदोलन खत्म होने के बाद किए गए वादे पूरे करने चाहिए। सभी एफआईआर वापस लेनी चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई रोकनी चाहिए। वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को लेटर लिखा है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, इसकी जानकारी दें। सीजेपी की ओर से पांच सितंबर के मार्च में शामिल होने के लिए छात्रों और युवाओं से अपील की गई है।
