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कार्यवाही में अनुचित तरीके से बाधा के लिए कांग्रेस जिम्मेदार : रीजीजू

New Delhi, Feb 09 (ANI): Union Minister Kiren Rijiju speaks in Lok Sabha during the Budget Session, in New Delhi on Monday. (Sansad TV/ANI Video Grab

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस पर मानसून सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही में ‘‘अनुचित तरीके से व्यवधान डालने’’ का आरोप लगाते हुए कहा कि देश में ऐसा पहली बार हुआ, जब सरकार चर्चा करना चाहती थी तो विपक्ष इससे भाग रहा था।

संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद, रीजीजू ने कहा कि सरकार खुश नहीं है क्योंकि संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों पर ठीक से चर्चा नहीं हुई और कार्य उत्पादकता बहुत कम रही है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में कार्य उत्पादकता महज 19 प्रतिशत और राज्यसभा में 39 प्रतिशत रही।

उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा पहली बार हमने देखा है कि जब सरकार चर्चा करना चाहती थी, तो विपक्ष इससे भाग रहा था। कार्यवाही में अनुचित तरीके से व्यवधान डालने के लिए कांग्रेस पूरी तरह जिम्मेदार है।

रीजीजू ने कहा यह लोकतंत्र के लिए, विशेष रूप से संसदीय लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि अगले संसद सत्र में विपक्ष के रवैये में ‘कुछ बदलाव’ होगा।

मंत्री ने कहा कि मॉनसून सत्र के दौरान 12 विधेयक पारित किए गए, लेकिन दुख की बात है कि केवल एक विधेयक ऐसा था जिस पर दोनों सदनों में चर्चा हुई।

केवल परीक्षा सुधार से संबंधित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर ही लोकसभा में चर्चा हुई। निचले सदन में हंगामे के बीच बाकी विधेयक चर्चा के बिना ही पारित कर दिए गए, वहीं उच्च सदन में सभी विधेयकों पर हंगामे के बीच चर्चा हुई।

केंद्रीय मंत्री ने कहा उन्होंने (विपक्ष) प्रश्नकाल नहीं चलने दिया। मैंने विशेष रूप कांग्रेस में एक चीज और देखी, उनके सांसद अब ऐसा सोचने लगे हैं कि उनका काम केवल नारे लगाना, हंगामा करना और तख्तियां तथा बैनर लहराना है।

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रीजीजू ने कहा आप सड़क पर कहीं भी नारेबाजी कर सकते हैं। सदस्य सदन में चुनकर आते हैं। वे यहां चर्चा और संवाद के लिए आते हैं। लेकिन एक ऐसा माहौल बनाया गया है जहां कांग्रेस सांसदों को लगता है कि उनका प्रमुख काम नारेबाजी करना है।

रीजीजू ने कहा कि उन्हें नये सांसदों के लिए बुरा लगता है जिनमें कांग्रेस के पहली बार के सदस्य भी हैं, जिन्हें मानसून सत्र में चर्चा में भाग लेने का मौका नहीं मिल सका।

उन्होंने कहा अगर चर्चा और संवाद नहीं होते तो वे कैसे सीखेंगे? यह कांग्रेस की गलती है। मुझे उम्मीद है कि जब हम अगली बार शीतकालीन सत्र के लिए मिलेंगे तो समझदारी से सोच-विचार के बाद (विपक्ष के रवैये में) कुछ बदलाव होगा।

उनसे जब पूछा गया कि क्या 2029 से पहले लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान वाले विधेयक को लाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है, तो रीजीजू ने जवाब दिया अभी भविष्य के बारे में मत पूछिए। हम वर्तमान में जीने वाले लोग हैं।

संसद का मानसून सत्र बीते 20 जुलाई को आरंभ हुआ था। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर चर्चा और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण दोनों सदनों में लगातार गतिरोध की स्थिति बनी रही।

सरकार ने कहा था कि वह छात्रों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा कराने और इस पर गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के लिए तैयार है, हालांकि विपक्ष का कहना था कि राम मंदिर से कथित चढ़ावा चोरी पर चर्चा, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर शाह के जवाब और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से माफी की मांग करने के मुद्दे एक दूसरे से जुड़े हुए हैं तथा वह इन तीनों मांगों पर कायम है।

Pic Credit : ANI

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