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अदालत हमें निर्देश न दे: चुनाव आयोग

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि अदालत उसके कामकाज में दखल न दे और उसे निर्देश न दे। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आए चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने कई निर्देश दिए थे। अदालत ने सत्यापन के दस्तावेज के तौर पर आधार को स्वीकार करने और जिन लोगों के नाम काटे गए हैं उनके ऑनलाइन आवेदन लेने का निर्देश दिया  था। अदालत इस बात पर नाराजगी जताई थी कि उसके आदेश पर जो बीएलओ आधार स्वीकार कर रहे थे उन्हें चुनाव आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया।

बहरहाल, चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है किस पूरे देश में समय समय पर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर कराना उसका विशेषाधिकार है। कोर्ट इसका निर्देश देगी तो ये अधिकार में दखल होगा। आयोग ने कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार मतदाता सूची बनाना और उसमें समय समय पर बदलाव करना सिर्फ चुनाव आयोग का अधिकार है। यह काम न किसी और संस्था और न ही अदालत को दिया जा सकता।

चुनाव आयोग ने कहा है, ‘हम अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और मतदाता सूची को पारदर्शी रखने के लिए लगातार काम करते हैं’। यह हलफनामा एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर दायर किया गया था। याचिका में मांग की गई थी कि चुनाव आयोग को भारत में विशेष रूप से चुनावों से पहले एसआईआर कराने का निर्देश दिया जाए, ताकि देश की राजनीति और नीति केवल भारतीय नागरिक ही तय करें।

गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने पांच जुलाई 2025 को बिहार को छोड़ कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को पत्र भेज कर एक जनवरी 2026 की पात्रता तिथि के आधार पर एसआईआर की तैयारियां शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 10 सितंबर को चुनाव आयोग ने देश के सभी राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के साथ दिल्ली में बैठक की। चुनाव आयोग खुद ही पूरे देश में एसआईआर कराने का ऐलान कर चुका है।

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