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प्रदर्शनकारियों की रिहाई में कोर्ट की शर्त

Supreme Court

नई दिल्ली। पेपर लीक के खिलाफ और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में हुए प्रदर्शनकारियों की रिहाई का मामला उलझता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे युवाओं को तुरंत रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत की इस शर्त से 18 साल से ज्यादा उम्र के प्रदर्शनकारियों या ऐसे प्रदर्शनकारी, जिनके खिलाफ पहले से कोई मुकदमा है, उनकी रिहाई में मुश्किल आ सकती है।

असल में मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुप्रीम  कोर्ट ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने यह बात सोमवार को भी कही थी। मंगलवार की सुनवाई में अदालत ने यह भी कहा कि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि पहली नजर में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत दिखती है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले दिए गए दिशा निर्देशों को अब अपडेट करने का समय आ गया है। 2018 में बने नियम 2026 में कितने कारगर हैं, इसकी भी समीक्षा होनी चाहिए, ताकि प्रदर्शन शुरू होते ही पुलिस के तय प्रोटोकॉल तुरंत लागू हो सकें।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कानून तोड़ने वालों को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ढाई सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र जांच से प्रदर्शनकारियों और पुलिस, दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। मामले की अगली सुनवाई तीन अगस्त को होगी। अदालत प्रदर्शन से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन, बॉडी कैमरा और दूसरे डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने को कहा है। दिल्ली सहित आठ राज्यों से जवाब मांगा गया है।

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