Jantar Mantar protest

  • जंतर मंतर पर कार्रवाई के लिए बनी जांच कमेटी

    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए एक कमेटी बना दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी बनाने की घोषणा की थी और गुरुवार को इस कमेटी के लिए पांच नामों की घोषणा कर दी। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी इस कमेटी के अध्य़क्ष बनाए गए हैं। इस कमेटी में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व...

  • पीएम ने माफी दी है, पार्टी ने नहीं!

    कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल ‘जेन जी’ यानी 14 से 29 साल की उम्र के छात्रों व युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा दिल दिखाते हुए माफ कर दिया था। हालांकि कायदे से प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और अन्य मंत्रियों, अधिकारियों आदि को माफी मांगनी चाहिए थी। आखिर नीट यूजी का पेपर लीक होने से 23 लाख के करीब छात्रों और उनके परिजनों को बेहिसाब परेशानियों का सामना करना पड़ा था। उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तीनों तरह की परेशानी हुई थी। उस पर किसी ने माफी नहीं मांगी थी और न...

  • पीएम की कथनी और पार्टी की करनी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर नौ दिन में पांचवा वीडियो अपलोड किया है। पहले चार वीडियो को 90 करोड़ व्यूज मिले थे। ऐसा दिखाया जा रहा है कि ये वीडियो प्रधानमंत्री अपने मोबाइल से बना कर डाल रहे हैं। इसका मकसद ‘जेन जी’ यानी 14 से 29 साल की उम्र के छात्रों और युवाओं से कनेक्ट करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पांचवें वीडियो में ब़ड़ा दिल दिखाते हुए कहा कि गालीबाज युवाओं को माफ कर देना चाहते हैं। उन्होंने पहले तो अपने को विक्टिम बताया और कहा कि आंदोलन के दौरान उनको गाली दी गई...

  • प्रदर्शनकारियों की रिहाई में कोर्ट की शर्त

    नई दिल्ली। पेपर लीक के खिलाफ और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में हुए प्रदर्शनकारियों की रिहाई का मामला उलझता दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 18 साल से कम उम्र के ऐसे युवाओं को तुरंत रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत की इस शर्त से 18 साल से ज्यादा उम्र के प्रदर्शनकारियों या ऐसे प्रदर्शनकारी, जिनके खिलाफ पहले से कोई मुकदमा है, उनकी रिहाई में मुश्किल आ सकती है। असल में मंगलवार को कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के आंदोलन के दौरान...

  • हत्या के आरोपी भी शामिल थे प्रदर्शन में

    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने नई जानकारी सामने आना का दावा किया है। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि उसकी जांच में पता चला है कि हत्या और गंभीर अपराध के आरोपी भी प्रदर्शन में शामिल हुए थे। ऐसे में लग रहा है कि सरकार आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों को पुलिस राहत नहीं देगी। दिल्ली पुलिस का दावा है कि उसकी जांच और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम की मदद से की गई पहचान से पता चला है कि सीजेपी के प्रदर्शन में हत्या के 101 आरोपी शामिल हुए...

  • आंदोलन को अपमानित न करें

    आपदा को अवसर बनाने की कला में माहिर राइटविंग के कई इन्फ्लूएंसर और हर घटनाक्रम में साजिश का पहलू खोजने वाले मोदी विरोधी दोनों एक साथ दावा कर रहे हैं कि जंतर मंतर पर हुआ आंदोलन प्रायोजित था और इस आंदोलन से सरकार को बहुत फायदा हुआ है। कहा जा रहा है कि सरकार बड़ी सफलता के साथ राममंदिर के चढ़ावा चोरी और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा लोगों के जेहन से निकालने में कामयाब हो गई। सोचें, यह कितना बेसिरपैर का तर्क है? चढ़ावा चोरी अब भी लोगों के जेहन में है और ई-20 पेट्रोल का मामला लोगों के...

  • यह कृतघ्न लोगों का देश है सोनम ‘सर’!

    उनको ‘सर’ कहा जाता है। लद्दाख की अपनी भाषा में ‘कागा ली’ यानी ‘सर’। वे अभी 59 साल के हैं, लेकिन जब 30 साल के थे तब भी लद्दाख के ज्यादातर लोग उनको ‘एचो’ यानी बड़ा भाई कहते थे। वे अपनी उम्र के आधार पर बड़ा भाई नहीं कहे जाते हैं और न किसी स्कूल का अध्यापक होने के नाते ‘सर’ कहे जाते हैं। ‘बड़ा भाई’ औऱ ‘सर’ ये दोनों उपाधियां उन्हें लद्दाख के लोगों ने देश, समाज और मानवता के प्रति उनके योगदान को देखते हुए उनके प्रति सहज स्नेह में दी है। तभी जब शुक्रवार की रात को...

  • सारी भूल सुधार एक साथ

    ऐसा लग रहा है कि केंद्र सरकार की आंखें खुल गई हैं और वह सारे भूल सुधार एक साथ करना चाह रही है। छात्रों और युवाओं के आंदोलन से पहले सरकार की आंखों पर पट्टी चढ़ी थी। ऐसा नहीं था कि वह पट्टी सिर्फ अहंकार की थी। राजनीतिक नासमझी की पट्टी भी सरकार की आंखों पर चढ़ी थी। राहुल गांधी की बहुजन राजनीति ने भाजपा को भी व्यापक हिंदुत्व की बजाय जातियों की राजनीति के रास्ते पर चला दिया था। रही सही कसर सरकार के कुछ नए नवेले सलाहकारों ने पूरी कर दी थी। उन्होंने भी समझा दिया था कि...

  • कॉकरोचः आगे रास्ता घुमावदार है

    सार यह है कि किसी एक मुद्दे पर सीमित रह कर बेहतर नतीजे हासिल कर लेना फिलहाल संभव नहीं रह गया है। इसीलिए ऐसी दीर्घकालिक राजनीति की जरूरत उत्तरोत्तर अधिक स्पष्ट होती जा रही है, जो पांच साल के चुनावी चक्र से प्रेरित ना हो। वैसी राजनीति, जो वोट के अधिकार एवं वोटिंग मशीनों से आगे जाकर सोचने में समर्थ हो- जिसके एजेंडे पर परिवर्तन, रचना एवं निर्माण का बड़ा लक्ष्य हो। कॉकरोच जनता पार्टी को इसका श्रेय है कि उसने भारत की ढहती शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था को अहम मुद्दा बना दिया है। शिक्षा की बिगड़ती हालत पर अब...

  • ‘झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए!’

    नई दिल्ली। जब आवाज़ें जुड़ती हैं, मन के तार मिलते है, सुर से सुर मिलते है तो कितनी ही कोशिश हो शक्ति बिखरती नहीं बल्कि संगठित होती है। और जब शक्ति संगठित हो जाती है, तो सबसे ताकतवर सत्ता को भी समझना, मानना होता है कि वह उतनी अजेय नहीं है, जितना उसने स्वयं को मान लिया था। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा अप्रत्याशित था। आखिर छात्र, नौजवान उनतीस दिनों से सड़कों पर थे। सोनम वांगचुक का अनशन आंदोलन को नैतिक ऊर्जा दे चुका था। लेकिन सरकार को भरोसा था कि यह विरोध भी बाकी आंदोलनों की तरह थक...

  • मोदी-शाह कैसे मारेंगे कॉकरोचों को?

    वैसे ही जैसे किसान आंदोलन, गुजरात के युवा पटेलों के आंदोलन या शाहीन बाग की भीड़ को खदेड़ा था। याद करें इन आंदोलनों के समय की टीवी चैनलों की इन रिपोर्टों को कि, आंदोलन की आड़ में अराजकता है। दिल्ली-यूपी बॉर्डर कानून व्यवस्था के लिए खतरा है। किसान देश भर में घूम रहे हैं। राजनीति कर रहे हैं। सिंधू बॉर्डर पर पानी की बोतलें, कप-प्लेटों के कूड़े का पहाड़ खड़ा है। टेंटों में एसी लग रहे हैं। मोदी के खिलाफ आंदोलनों की एक सी क्रोनोलॉजी है। देखो भीड़ के इन मुसलमान चेहरों को। अरे, सरदार भी दिख रहा है। अरे,...

  • यह एक पूरी पीढ़ी का आंदोलन है

    नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन और सोनम वांगचुक की 26 दिन तक चली भूख हड़ताल की तुलना 2011 के अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से की जा रही है। ऊपर से देखने पर लगेगा कि वैसा ही आंदोलन है। इससे पहले हुए किसी दूसरे आंदोलन से भी इसकी तुलना की जा सकती है। कह सकते हैं कि छात्र और नौजवान वैसे ही उद्वेलित हुआ, जैसे 2012 में निर्भया कांड के समय था। ऊपरी तौर पर इसकी तुलना पिछले पांच दशक में हुए किसी भी दूसरे आंदोलन से की जा सकती है।...

  • आंदोलन की साख नहीं बिगाड़ सकी सरकार

    नीट यूजी पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर पर हुए आंदोलन में सरकार और भाजपा को हर मोर्चे पर मात मिली। पिछले 12 साल में तैयार किया गया उसका कोई भी टूल इस बार काम नहीं आया। तमाम कोशिश के बावजूद सरकार, भाजपा और समर्पित मीडिया मिल कर इस आंदोलन को देशद्रोहियों का या भारत विरोधियों का या अमेरिका, चीन, पाकिस्तान प्रायोजित नहीं बता पाए। क्योंकि छात्रों और युवाओं के आक्रोश की वजहें इतनी ठोस थीं कि वे इस आंदोलन को सरकार विरोधी आंदोलन भी नहीं बता सके। इससे पहले हर आंदोलन में सरकार का अपना एक पक्ष होता था।...

  • नई पीढ़ी का अंदाज भी नया है

    नीट यूजी पेपर लीक के खिलाफ जंतर मंतर का आंदोलन सचमुच नई पीढ़ी का आंदोलन थे। सिर्फ इस लिहाज से नहीं कि नई पीढ़ी के लोग इसमें शामिल हुए। वह एक पहलू है कि वयस्क होने से पहले की उम्र वाले किशोर और युवा इस आंदोलन का हिस्सा बने। इस लिहाज से भी यह नई पीढ़ी का आंदोलन था कि इसमें नए साधनों और नए माध्यमों का खुल कर इस्तेमाल हुआ। छात्र और युवा सोशल मीडिया के जरिए अपना नैरेटिव बना रहे हैं। उनकी रचनात्मकता देखना वाली है। वे पारंपरिक मीडिया या पुराने व स्थापित सोशल मीडिया हैंडल्स के भरोसे...

  • मुद्दा दलगत नहीं है

    मुद्दा संसदीय गतिरोध नहीं, बल्कि सड़कों पर खड़ा हो रहा गतिरोध है। सरकार को इसे समझने की संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। मुद्दे को दलगत दायरे में समेटने का नजरिया जोखिम भरा साबित हो सकता है। मुद्दा शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा है, लेकिन सरकार ने अपना पक्ष रखने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को सौंपी। उधर अपनी प्रेस कांफ्रेंस में जेपी नड्डा ने कॉकरोच आंदोलन की मांगों पर चर्चा करने के बजाय संसदीय गतिरोध दूर करने के लिए विपक्ष के सामने प्रस्ताव रखा। कहा कि नीट और अन्य परीक्षाओं में ‘वर्तमान एनडीए एवं पूर्व यूपीए सरकारों के दौरान हुई’ पेपर...

  • जंतर-मंतरः आग अभी बुझी नहीं है

    ग्राउंड रिपोर्ट नई दिल्ली। लुटियन दिल्ली को सोमवार को जिस छात्र आंदोलन ने झकझोरा था, उसकी आग अब भी बुझी नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब इस आंदोलन को सबसे अधिक ऊर्जा जेनरेशन-ज़ेड का रचनात्मक हास्य है। गुस्सा है, लेकिन उसके साथ व्यंग्य है, मीम हैं, तख्तियों पर लिखी चुटीली पंक्तियाँ हैं और व्यवस्था को चुनौती देने का एक नया आत्मविश्वास भी। राहुल गांधी की हिरासत के एक दिन बाद बुधवार को दिल्ली के संसद इलाके का माहौल तनावपूर्ण था, लेकिन वजह बदल चुकी थी। सरकार के लिए यह घेराबंदी का एक और दिन था। वही छात्रों के...

  • छीना-झपटी ठीक नहीं

    विपक्ष को कॉकरोच आंदोलन में ‘राजनीतिक पूंजी’ नजर आई हो, तो यह स्वाभाविक ही है। वैसे, अभी वक्त इस पूंजी को सहेजने का है, लेकिन इन पार्टियों में अभी से इसकी छीना-झपटी के संकेत मिलने लगे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन देशवासियों के बड़े हिस्से का ध्यान खींचने में सफल रहा है। सोमवार को उसके संसद मार्च के दौरान बड़े पैमाने पर छात्रों पर दमन ने उसके एंजेडे के लिए समर्थन में और इजाफा किया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर जोर डालने के लिए जगह-जगह हुए स्वतःस्फूर्त प्रतिरोध से साफ है कि जनमत का...

  • क्या अब युवाओं से लड़ेगी सरकार?

    पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक संदर्भ में जिस ‘जेन जी’ की बात हो रही थी उसके आक्रोश की एक झलक जंतर मंतर पर दिखी है। हजारों की संख्या में छात्र और युवा जंतर मंतर पर इकट्ठा हुए और उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के उठाए मुद्दों का समर्थन किया। विपक्ष और सिविल सोसायटी के किसी भी आंदोलन से अपने को पूरी तरह से सुरक्षित मान रही केंद्र सरकार के लिए यह हैरान करने वाला घटनाक्रम था। सरकार में शायद किसी ने नहीं सोचा था कि जिस युवा वर्ग या आकांक्षी युवा वर्ग के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति एक...

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