प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर नौ दिन में पांचवा वीडियो अपलोड किया है। पहले चार वीडियो को 90 करोड़ व्यूज मिले थे। ऐसा दिखाया जा रहा है कि ये वीडियो प्रधानमंत्री अपने मोबाइल से बना कर डाल रहे हैं। इसका मकसद ‘जेन जी’ यानी 14 से 29 साल की उम्र के छात्रों और युवाओं से कनेक्ट करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पांचवें वीडियो में ब़ड़ा दिल दिखाते हुए कहा कि गालीबाज युवाओं को माफ कर देना चाहते हैं। उन्होंने पहले तो अपने को विक्टिम बताया और कहा कि आंदोलन के दौरान उनको गाली दी गई और उनकी मां के बारे में अपमानजनक बातें कही गईं। इसके बाद उन्होंने कहा कि वे गाली देने वालों को माफ कर देना चाहते हैं क्योंकि वो बच्चे हैं और गुमराह हैं। उनको सही रास्ता दिखाना होगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि बच्चों को परेशान करना और उनको कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने के लिए मजबूर करना अच्छा नहीं होगा। उन्होंने समाज से भी उन्हें माफ करने की अपील की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यह एक बड़ा झटका था कि ‘हमारी बेटियां इस तरह की भाषा’ का इस्तेमाल कैसे कर रही हैं।
इस पूरे वीडियो में कई सारे विरोधाभास और विडंबनाएं हैं लेकिन उनको छोड़ें। असली बात यह है कि प्रधानमंत्री को माफी देने में इतना समय क्यों लगा और जब उन्होंने वे चाहते थे कि बच्चों को माफी दी जाए तो उनकी पार्टी और उनकी पुलिस क्यों बच्चों को परेशान कर रही है? सोचें, प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार की रात को यह वीडियो बनाया और उसी दिन पुलिस ने नोएडा की रहने वाली रुचिका सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। रुचिका का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह प्रधानमंत्री मोदी को गालियां दे रही है। यह वीडियो एक हफ्ते से वायरल हो रहा था। लेकिन पुलिस ने मुकदमा नहीं दर्ज किया था। यह संयोग है कि पुलिस ने शुक्रवार को दिन में मुकदमा दर्ज किया और उसी दिन रात में प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो बना कर सबको माफ करने की इच्छा जताई। ध्यान रहे गाली देने के मामले में रुचिका का केस पहला मामला था। उससे पहले आलोचना हो रही थी लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ था। सो, पहले मुकदमा दर्ज हुआ और उसके माफी देने और कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने से बच्चों को बचाने वाला वीडियो आया।
दूसरी बात यह है कि प्रधानमंत्री इतना उदार हृद्य दिखा रहे हैं और दूसरी ओर उनकी पार्टी और राइटविंग का इकोसिस्टम लगातार बच्चों को नसीहत दे रहा है या टारगेट कर रहा है। खबर है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलने और गाली गलौज की भाषा इस्तेमाल करने वालों को सोशल मीडिया में टारगेट किया जा रहा है। हैरानी की बात है कि लड़कों को निशाना नहीं बनाया जा रहा है। चुन चुन कर लड़कियों को टारगेट किया जा रहा है। उनके बारे में उलटी सीधी बातें लिखी जा रही हैं। उनका चरित्र हनन किया जा रहा है। यौन हिंसा की धमकी दी जा रही है। सोचें, पिछले गुरुवार यानी 23 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने इंस्टाग्राम पर पहला वीडियो पोस्ट किया था। उसमें उन्होंने युवाओं को फ्रेंड्स कह कर संबोधित किया और पेपर लीक पर उनकी चिंताओं को दूर करने का वादा किया। उसी दिन खबर आ गई थी कि प्रधानमंत्री युवाओं से सीधा कनेक्ट बना रहे हैं। इसके बावजूद छात्रों और युवाओं को विलेन बनाने का काम चलता रहा। यहां तक प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों से प्रेस कॉन्फ्रेंस कराया गया। उसमें प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर हुए हमले की फुटेज दिखाई गई और प्रदर्शनकारियों को उपद्रवी ठहराने का प्रयास हुआ।
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