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फैसला सुरक्षित रखने की समय सीमा तय

हत्याकांड

नई दिल्ली। देश भर की उच्च अदालतों में फैसलों में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, ‘किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद उसे तीन महीने के भीतर सुनाया जाना चाहिए। अगर तीन महीने तक फैसला नहीं आता है, तो हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल उस मामले को चीफ जस्टिस के सामने रखेंगे’।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साथ ही यह भी कहा कि जमानत याचिकाओं पर आदेश उसी दिन सुनाया जाए। अगर फैसला सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अगले दिन जरूर जारी किया जाए और तुरंत वेबसाइट पर अपलोड किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में 12 निर्देश जारी किए। ये निर्देश झारखंड सरकार से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें आरोप था कि हाई कोर्ट ने 2022 से फैसला नहीं सुनाया है।

यह मामला अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के चार दोषियों की याचिका से जुड़ा है। उनका कहना था कि झारखंड हाई कोर्ट में उनकी क्रिमिनल अपील 2022 से पेंडिंग है, लेकिन अब तक फैसला नहीं सुनाया गया। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि फैसले में इतनी देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है।

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