फैसला सुरक्षित रखने की समय सीमा तय
नई दिल्ली। देश भर की उच्च अदालतों में फैसलों में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, ‘किसी भी मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद उसे तीन महीने के भीतर सुनाया जाना चाहिए। अगर तीन महीने तक फैसला नहीं आता है, तो हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल उस मामले को चीफ जस्टिस के सामने रखेंगे’। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साथ ही यह भी कहा कि जमानत याचिकाओं पर आदेश उसी दिन सुनाया जाए। अगर फैसला सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अगले दिन जरूर जारी किया...