नई दिल्ली। आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए इस्तीफे में तो पता नहीं उन्होंने क्या लिखा है लेकिन उन्होंने दो पन्नों की एक चिट्ठी ‘युवा साथियों’ के नाम जारी की है। इसमें उन्होंने कमियां स्वीकार करने की बजाय यह बताया है कि उन्होंने कितना अच्छा काम किया था। प्रधान ने लिखा है कि युवाओं के आंदोलन का कुछ लोग अपने लाभ के लिए गलत इस्तेमाल कर सकते थे इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है। प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का प्रभार दिया गया है।
दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने प्रधान के इस्तीफे को अपनी जीत बताया है। नीट यूजी पेपर लीक विवाद पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर पिछले 36 दिन से प्रदर्शन कर रहे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस्तीफे की खबर के बाद घुटनों के बल बैठ कर मंच पर हाथ पटका और कहा, ‘हमने कर दिखाया’। दीपके ने केंद्र सरकार को झुकाने का दावा करते हुए कहा, ‘वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए’।
गौरतलब है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 12 साल में पहली बार उनकी सरकार के किसी मंत्री को बाहरी दबाव में इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनिया भर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे। महिला पत्रकारों ने आगे आकर उनके ऊपर इल्जाम लगाए थे, जिसके बाद उनका इस्तीफा हुआ था।
बहरहाल, धर्मेंद्र प्रधान केंद्र की मोदी सरकार के उन चुनिंदा मंत्रियों में से थे, जो मई 2014 से लेकर अभी तक लगातार 12 साल से ज्यादा समय तक मंत्री रहे। इसलिए उनका इस्तीफा केंद्र सरकार के लिए मुश्किल वाला फैसला था। परंतु छात्रों और युवाओं की शक्ति के आगे सरकार को झुकना पड़ा। प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर मंतर पर दीपके ने कहा, ‘मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है, तो निकलता नहीं। जिन बच्चों ने सुसाइड किया, उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिसवालों पर एक्शन हो’। सीजेपी ने इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर कहा, ‘कॉकरोच की जीत हुई’।
उधर सोनम वांगचुक ने मेदांता अस्पताल से सोशल मीडिया पर लिखे एक पोस्ट में कहा, ‘यह लोकतंत्र की जीत है, प्रत्यक्ष लोकतंत्र… सड़कों से मिली जीत। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। सीजेपी और जेन जी को बधाई। देश के हर कोने से उठ खड़े होने के लिए सभी नागरिकों को धन्यवाद’। गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने 26 दिन तक भूख हड़ताल की थी और सबसे पहले गुरुवार को सरकार ने उन्हीं के साथ समझौता करके उनकी भूख हड़ताल समाप्त कराई थी।
