नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विचाराधीन श्रेणी में रखे गए 60 लाख मतदाताओं में से 47 लाख मतदाताओं की आपत्तियों का निपटारा कर दिया गया है। हालांकि चुनाव आयोग ने यह नहीं बताया है कि इनमें से कितने लोगों के नाम काटे गए हैं। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि करीब 47 लाख आपत्तियों का निपटारा 31 मार्च तक कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि उसे यह जानकारी 31 मार्च को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने एक चिट्ठी के जरिए दी।
हाई कोर्ट ने बताया है कि हर दिन दो लाख तक आपत्तियों को निपटाया जा रहा है। सभी लंबित आपत्तियों का निपटारा सात अप्रैल तक पूरा होने की संभावना है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा, ‘हम इन आंकड़ों से काफी खुश हैं’। सुप्रीम कोर्ट अब छह अप्रैल को बंगाल में चल रहे एसआईआर के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करेगा।
गौरतलब है कि बंगाल में एसआईआर के बाद 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची जारी हुई थी। इसमें 7.04 करोड़ वोटर के नाम थे। इनमें से 60 लाख से कुछ ज्यादा नाम न्यायिक जांच के दायरे में रखे गए। इन्हें मतदाता सूची में रखने या हटाने पर फैसले के लिए 705 न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया गया था। इसमें जिन लोगों के नाम कटेंगे उनकी आपत्तियों की सुनवाई के लिए 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल गठित किए गए हैं। इनकी अध्यक्षता हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस और जज करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को वोटर लिस्ट में गलत तरीके से जोड़े या हटाए नामों को सुधारने का अधिकार दिया है।
