नई दिल्ली। महिला आरक्षण और परिसीमन पर डीएमके से समर्थन की उम्मीद कर रही भाजपा को झटका लगा है। डीएमके संसदीय बोर्ड की शनिवार को हुई बैठक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध करने का फैसला हुआ है। साथ ही पार्टी ने एसआईआर में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। गौरतलब है कि कांग्रेस सहित सभी विपक्षी पार्टियां भी यही मांग कर रही हैं।
हालांकि डीएमके ने एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ साथ कांग्रेस पर भी सवाल उठाए। संसदीय दल की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता ए राजा ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि डीएमके शुरुआत से एसआईआर का विरोध कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को डीएमके की आलोचना करने का नैतिक अधिकार नहीं है। बहरहाल, संसदीय दल की बैठक में चार प्रस्ताव पास किए गए।
गौरतलब है कि चार मई को आए विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस और डीएमके अलग हो गए हैं। कांग्रेस ने टीवीके से अलायंस कर लिया है। बहरहाल, ए राजा ने कहा कि डीएमके ने एसआईआर लागू होने के समय से ही इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने संसद के अंदर और बाहर कई कदम उठाए हैं और पार्टी का यह रुख अभी भी कायम है। उन्होंने बताया कि डीएमके संसदीय दल का प्रस्ताव तमिलनाडु की जनता और देश भर के राजनीतिक पर्यवेक्षकों के सामने पार्टी के विरोध का क्रम रखने के लिए तैयार किया गया है।
एसआईआर की प्रक्रिया पर निशाना साधते हए राजा ने कहा कि इसके जरिए वैध वोटर्स को वोटिंग के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। डीएमके ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर एसआईआर का विरोध कर रही है, लेकिन केरलम और तमिलनाडु में वह इसी तरह की आलोचना से बच रही है। प्रस्ताव में टीवीके प्रमुख और राज्य के मुख्यमंत्री विजय की चुप्पी पर भी सवाल उठाया गया।
