चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बाद महाराष्ट्र में 2,07,93,916 और नयी दिल्ली में 47,56,722 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची के ड्राफ़्ट से हटा दिये हैं।
घर-घर जाकर बड़े पैमाने पर किए गए सत्यापन एवं डिजिटलीकरण प्रक्रिया से पता चला है कि महाराष्ट्र में पंजीकृत लगभग 9.78 करोड़ मतदाताओं में से केवल 7.69 करोड़ रिकॉर्ड ही सफलतापूर्वक सत्यापित एवं डिजिटलीकृत किये जा सके हैं।
इसी प्रकार राष्ट्रीय राजधानी में भी ऐसा ही पैटर्न देखा गया, जहां कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से केवल 97,53,507 लोगों के नाम ही अंतिम ड्राफ़्ट में शामिल हो पाये जिससे दिल्ली के लगभग एक-तिहाई मतदाता सूची से बाहर रह गये।
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बड़ी संख्या में नाम हटाये जाने का कारण गिनती के फ़ॉर्म जमा न हो पाना, लोगों का एक जगह से दूसरी जगह जाना, तेज़ी से शहरीकरण और जमीनी स्तर पर काम के दौरान तकनीकी दिक्कतें आदि को बताया है। जिन लोगों के नाम हटाये गये, उनमें मुख्य रूप से वे मतदाता शामिल हैं जो दूसरी जगह चले गये हैं, जो अपने रजिस्टर्ड पते पर बार-बार नहीं मिले, जिनकी मौत हो चुकी है और जिनके नाम एक से ज़्यादा चुनाव क्षेत्रों की लिस्ट में थे।
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चुनाव अधिकारियों ने इस बात पर बल दिया है कि ड्राफ़्ट मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब वोट देने का अधिकार हमेशा के लिए खोना नहीं है। जिन नागरिकों के नाम लिस्ट में शामिल नहीं किये गये हैं उन्हें दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कानूनी तौर पर समय दिया गया है।
चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 31 अगस्त से 30 सितंबर, 2026 के बीच दावे एवं आपत्तियां दर्ज करायी जा सकती हैं। सभी आवेदनों पर कार्रवाई करके उनका निपटारा 29 अक्टूबर, 2026 तक कर दिया जायेगा, जिससे चार नवंबर, 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का रास्ता साफ हो जायेगा।
मतदाताओं को सलाह दी गयी है कि वे स्थानीय बूथ लेवल अधिकारियों या राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी पुष्ट कर लें और 30 सितंबर की समय-सीमा से पहले दोबारा नाम दर्ज कराने के लिए फ़ॉर्म छह या जानकारी में सुधार के लिए फ़ॉर्म आठ भरें।
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