नई दिल्ली। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट से शुरू हुए विवाद को समाप्त करने के लिए शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने एक साथ बैठक की और सभी मुद्दों पर सफाई दी। एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर पूर्ण आयोग की बैठक हुई, जिसके बाद सभी मुद्दों पर सफाई दी गई। आयोग की ओर से कहा गया कि अखबार की रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की ओर से असहमति जताने का जिक्र किया गया है वह एसआईआर को लेकर नहीं है। यह भी कहा गया कि एसआईआर आम सहमति से लिया गया फैसला था।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शनिवार को हुई बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी शामिल हुए। बैठक में विवाद से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिया गया। कहा गया कि दो चुनाव आयुक्तों संधू और जोशी ने कैबिनेट सचिव को जो चिट्ठी भेजी था, वह एसआईआर या चुनाव आयोग के किसी फैसले से जुड़ी नहीं थी, बल्कि चुनाव पैनल में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित थी।
शनिवार को हुई आयोग की पूर्ण बैठक के दौरान अंदरूनी मतभेद की खबरों को खारिज किया गया और कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों पर बिंदुवार सफाई दी गई। आयोग ने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर सहित सभी अहम फैसले पूरे आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे। मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों ने ने एकजुटता दिखाते हुए अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शनिवार को इन मुद्दों पर चर्चा के लिए बैठक की।
बैठक के बाद आयोग ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि घोषित फैसलों को पूरे आयोग की मंजूरी मिली हुई थी। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई। इसके बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों ने ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग में मनमानी करने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग करते हुए पूरे देश में शुक्रवार को प्रदर्शन किया।
बहरहाल, आयोग ने गोवा में उन 97 वोटरों के मामले पर भी बात की, जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। आयोग ने कहा कि गोवा के मुख्य चुनाव अधिकारी ने बूथ लेवल अधिकारियों को घर घर जाकर उनके फ़ॉर्म इकट्ठा करने का निर्देश दिया था। 97 मतदाताओं में से 81 ने नाम शामिल करवाने के लिए पहले ही फ़ॉर्म छह भर दिया था। शनिवार की बैठक में आयोग ने अपने अंदरूनी कामकाज को बेहतर बनाने के लिए भी कई उपाय बताए। तय किया गया कि अब आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले ही भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही का ब्यौरा जारी किया जाएगा। आयोग ने कहा है कि कमिश्नरों की ओर से अधिकारियों को दिए गए निर्देशों का पूरी सख्ती से पालन किया जाएगा।
