नई दिल्ली। विदेशी चंदे के नियमन से जुड़े एफसीआरए कानून में संशोधन के लिए लाए गए बिल पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी की पहली बैठक शुक्रवार को नई दिल्ली में हुई। भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति में 31 सदस्य हैं, जिसमें भाजपा के 14 सांसद हैं। समिति में एनडीए का बहुमत है। इसलिए समिति का फैसला सरकार के बिल के खिलाफ नहीं होगा।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस विवादित बिल को मार्च में पेश किया था लेकिन केरल के विधानसभा चुनाव की वजह से इसे रोक दिया था। चुनाव नतीजों के बाद संसद के मानसून सत्र में बिल को जेपीसी में भेजा गया। जेपीसी को 2026 के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक लोकसभा में रिपोर्ट देनी है।
विपक्ष का आरोप है कि एफसीआरए में संशोधन का बिल ईसाई एनजीए और अल्पसंख्यक संस्थानों की वैध फंडिंग रोक कर अल्पसंख्यकों को परेशान करने के लिए लाया गया है। सरकार ने इस आरोप खारिज करते हुए कहा है कि बिल धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है। यह भी कहा जा रहा है कि विदेशी और खास कर अमेरिका के दबाव में इस बिल को टाला जा रहा है।
यह बिल इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। विपक्षी दलों के लगातार विरोध के बाद इसे 12 अगस्त को जेपीसी को भेजा गया। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि बिल के कुछ प्रावधान बेहद आपत्तिजनक हैं, जिसमें विदेशी फंडिंग बंद होने या एफसीआरए लाइसेंस निरस्त होने पर एनजीओ की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान भी शामिल है। समिति अब बिल के सभी प्रावधानों की विस्तृत जांच करेगी। लोकसभा में बिल पेश करते समय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा था कि कानून का लक्ष्य पारदर्शिता बढ़ाना है। उन्होंने कहा था कि इससे विदेश से मिले फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।
