नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान दिल्ली के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई की। अदालत ने दिल्ली में एसआईआर को लेकर आयोग से सवाल पूछे और दो टूक अंदाज में कहा कि फॉर्म छह, सात और आठ में बदलाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म जमा करने की 30 अक्टूबर की तारीख को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि अभी चुनाव नहीं है तो इतनी जल्दबाजी करने की क्या जरुरत है?
अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा मसौदा मतदाता सूची से बाहर हुए करीब 43 लाख मतदाताओं में जिनके नाम ‘शिफ्टेड या अनुपस्थित’ श्रेणी में दर्ज हैं, उन्हें दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म छह भरने को क्यों कहा जा रहा है? यह फॉर्म नए मतदाताओं के पंजीयन के लिए होता है, जबकि ये लोग पहले से ही वोटर लिस्ट में शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से कहा कि फॉर्म छह, सात और आठ में बदलाव नहीं किया जा सकता है।
गौरतलब है कि दिल्ली में एसआईआर से पहले करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। 31 अगस्त को जारी मसौदा मतदाता सूची में करीब 97.53 लाख नाम शामिल किए गए। इस तरह करीब 47.57 लाख नाम बाहर हो गए। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में हुई। चुनाव आयोग की ओर से सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्रि नायडू ने पक्ष रखा। सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता भी मौजूद रहे।
अदालत ने कहा कि जिन लोगों के नाम पहले मतदाता सूची में थे और अब नहीं हैं, उन्हें ‘नए वोटर’ मानने के बजाय उनकी स्थिति के मुताबिक समाधान निकालें। अदालत ने यह भी पूछा कि राष्ट्रीय राजधानी में निकट भविष्य में कोई चुनाव नहीं होने पर इतनी जल्दी की समयसीमा क्यों रखी जा रही है। कोर्ट ने कहा, ‘नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए कट ऑफ तारीख तय न करें’। इसके बाद चुनाव आयोग ने आवेदन जमा करने की समयसीमा बढ़ाने की इच्छा जताई है।
