नई दिल्ली। चुनाव आयोग के कामकाज पर उठे सवाल और मनमाने तरीके से नाम काटे जाने के आरोपों के बीच चुनाव आयोग की एक अहम बैठक शनिवार को हुई। आयोग की पूर्ण बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी भी शामिल हुए। इस बैठक में तय किया गया कि जिनके नाम कटे हैं उनके फॉर्म इकट्ठा करने के लिए आयोग के लोग घर घर जाएंगे। शनिवार की बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र में एसआईआर से जुड़े दावे व आपत्तियां लेने की तारीख भी बढ़ा दी गई है।
शनिवार की बैठक के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि जिन लोगों के एसआईआर में नाम काटे गए हैं, उनके दावे और आपत्तियों की समय सीमा बढ़ाई गई है। जिन लोगों को नाम मैप नहीं होने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण नोटिस भेजा गया है, बीएलओ उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। इन पर रीजनल इलेक्टोरल अफसर फैसला लेगा।
इसके अलावा बैठक में नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त हेल्प डेस्क या स्पेशल कैंप लगाए जाने का भी फैसला किया गया। गौरतलब है कि एसआईआर के दौरान अब तक 30 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूची से 13.37 करोड़ नाम कम हुए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक देश में कुल 96.88 करोड़ मतदाता हैं। इस लिहाज से करीब 14.1 फीसदी मतदाताओं के नाम एसआईआर में काटे गए।
मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों के बीच यह बैठक हुई। इस बैठक में फैसला किया गया कि दिल्ली, महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। दिल्ली में विवाद का निपटारा 30 नवंबर और महाराष्ट्र में निपटारा 10 नवंबर तक करना होगा। यह भी कहा गया कि गोवा में जिन मतदाताओं का नाम छूट गया है, वहां ब्लॉक अफसर घर घर जाकर फॉर्म छह इकट्ठा करेंगे।
गौरतलब है कि ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म छह में बिना सहमति के बदलाव करने की खबर दी गई है। इसे लेकर भी चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण दिया। चुनाव आयोग ने शनिवार की बैठक के बाद कहा कि फॉर्म छह पर कोई विवाद है ही नहीं। फॉर्म छह को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
