बेंगलुरू। तमिलनाडु और केरल के बाद अब कर्नाटक के राज्यपाल ने सरकार के साथ टकराव का इरादा दिखाया है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने गुरुवार, 22 जनवरी से शुरू हो रहे विधानमंडल के सत्र के पहले दिन साझा बैठक को संबोधित करने से इनकार कर दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अभिभाषण के कई पैराग्राफ को लेकर आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि सत्र 22 जनवरी से शुरू होगा और 31 जनवरी तक चलेगा।
राज्यपाल की आपत्ति और सत्र को संबोधित करने से इनकार के बाद कर्नाटक के कानून व संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल के नेतृत्व में नेताओं की एक टीम लोक भवन में राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि राज्यपाल के ऑफिस ने सरकार के अभिभाषण के 11 पैराग्राफ पर आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि केरल में भी राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने अभिभाषण के दो पैराग्राफ का हिस्सा नहीं पढ़ा था। उधर तमिलनाडु के राज्यपाल बिना अभिभाषण पढ़े ही सदन छोड़ कर चले गए थे।
बहरहाल, कर्नाटक विधानमंडल का सत्र हंगामेदार हो सकता है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस की राज्य सरकार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बनाए नए कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाने की योजना बना रही है। संसद के पिछले सत्र में मनरेगा को समाप्त करके विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी वीबी जी राम जी कानून लाया गया है। कर्नाटक विधानमंडल में इसके खिलाफ प्रस्ताव लाया जाएगा और पुराने कानून की बहाली की मांग की जाएगी।
