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अमेरिकी सांसद के बयान से भारत नाराज

भारत

New Delhi, May 13 (ANI): MEA Spokesperson Randhir Jaiswal addresses a press conference, in New Delhi on Tuesday. (ANI Photo)

नई दिल्ली। विदेशी चंदे के विनियमन के लिए बने कानून, एफसीआरए में संशोधन को लेकर अमेरिकी सांसद की ओर से दिए गए बयान पर भारत ने नाराजगी जताई है। भारत ने साफ कर दिया है कि एफसीआरए में संशोधन का विधेयक भारत का आतंरिक मामला है। भारत ने कहा है कि किसी दूसरे देश को इस पर टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दुनिया के कई देशों, जिनमें अमेरिका भी शामिल है, वहां विदेशी फंड और विदेशी अंशदान को नियंत्रित करने के लिए कानून और नियम मौजूद हैं।

गौरतलब है कि भारत ने अमेरिकी सांसद रिले मूर ने इसे लेकर टिप्पणी की थी, जिसका जवाब रणधीर जायसवाल ने दिया। मूर ने चार अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि एफसीआरए बिल ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला है। ध्यान रहे एफसीआरए संशोधन विधेयक इसी साल बजट सत्र में लोकसभा में पेश किया गया था। मानसून सत्र में इस पर चर्चा होनी है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह चर्चा का जवाब दे सकते हैं।

इसे लेकर अमेरिकी सांसद रिले मूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ईसाई धर्म भारत में तब से मौजूद है। जब प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ दशकों बाद संत थॉमस मलाबार तट पर पहुंचे थे। लेकिन ईसाई धर्म के इस लंबे इतिहास के बावजूद, भारत की संसद एफसीआरए में ऐसा संशोधन करने पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की अनुमति मिल सकती है। यह ईसाइयों के खिलाफ सीधा हमला है’। उन्होंने आगे लिखा, ‘यदि यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा’।

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