नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए एक कमेटी बना दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने एक दिन पहले ही उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी बनाने की घोषणा की थी और गुरुवार को इस कमेटी के लिए पांच नामों की घोषणा कर दी। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी इस कमेटी के अध्य़क्ष बनाए गए हैं।
इस कमेटी में पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर डीजीपी डॉ. एलआर बिश्नोई शामिल हैं। यह कमेटी हर पहलू से पुलिस कार्रवाई की जांच करेगी। यहां तक कि पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर भी यह कमेटी सिफारिश कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक यह कमेटी इस बात की जांच करेगी कि क्या छात्रों के संसद मार्च के दौरान पुलिस ने जरुरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया? महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार जैसे आरोपों की भी जांच की जाएगी। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जंतर मंतर पर 36 दिन चला था और 25 जुलाई को तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ था।
बहरहाल, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट में 18 अगस्त को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा था कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था। इसकी अनुमति नहीं थी। पुलिस ने हलफनामा देकर सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन में कई हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे। पुलिस ने बताया कि संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस से मारपीट की, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा।
