नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ी जीत मिली है। ईरान में चल रहा युद्ध रोकने के लिए लाया गया प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट में पास नहीं हो पाया है। यह प्रस्ताव एक वोट से गिर गया। गुरुवार को इस प्रस्ताव पर वोटिंग हुई थी, जिसमें इसके पक्ष में 49 और विरोध में 50 वोट पड़े। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के एक सांसद डेव मैककॉर्मिक वोटिंग में शामिल नहीं हुए। अब राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध के बारे में खुद फैसला कर सकेंगे।
अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता, तो अमेरिकी राष्ट्रपति को ईरान पर हमलों से पहले संसद की मंजूरी लेना जरूरी हो जाता। असल में ईरान में चल रहे युद्ध को लेकर विपक्षी सांसद मांग कर रहे हैं कि ऐसे किसी भी सैन्य अभियान पर अंतिम फैसला संसद ही करे। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव को सीनेट में लाने के लिए दोबारा कोशिश करनी होगी। सैन्य कार्रवाई रोकने का विधेयक फिलहाल अमेरिकी सीनेट की विदेश मामलों से जुड़ी कमेटी के पास है।
उधर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने केश्म द्वीप पर रिहायशी इलाकों पर हुए कथित अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे आतंकी हमला बताते हुए कहा कि अमेरिका बेगुनाह लोगों का खून बहा रहा है और उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका हर दिन नया अपराध कर रहा है। युद्ध के मैदान में मिली हार का बदला वह आम नागरिकों को निशाना बनाकर ले रहा है’।
इससे पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया था कि उसने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी आईआरजीसी के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों व तटीय रक्षा केंद्रों पर बड़े पैमाने पर हमले किए। अमेरिकी हमले के विरोध में ईरान भी जॉर्डन, कुवैत आदि में हमला कर रहा है। इस बीच खबर आई थी कि कुवैत में ईरान के हमले में चीन का नागरिक घायल हो गया है। हालांकि चीन ने कहा है कि कुवैत पर ईरान के हमले में उसका कोई भी नागरिक घायल नहीं हुआ है। चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि जांच के बाद उन्हें यह जानकारी मिली है। इससे पहले गुरुवार को कुवैत में एक चीनी इमारत पर ड्रोन हमला हुआ था। यह हमला ईरान की तरफ से किया गया था।
