Iran US war

  • चिंगारी फिर सुलग उठी

    पश्चिम एशिया की ताजा घटनाओं से फिर पुष्टि हुई है कि कोई देश महज युद्ध शुरू करने के लिए स्वतंत्र होता है। उसके बाद जंग का अपना गतिशास्त्र बन जाता है, जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं होता। डॉनल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पश्चिम एशिया युद्ध का नियंत्रण उनके हाथ में है और उनके निर्देश पर बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के ताजा हमलों का जवाब नहीं देंगे। मगर कुछ घंटों के बाद ही इजराइल ने ईरान पर हवाई हमले शुरू कर दिए। इससे साफ हो गया है कि जंग की दिशा अनियंत्रित हो गई है। रविवार रात ईरान ने इस...

  • ईरान पर अमेरिका का पलटवार

    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान ने एक दूसरे पर हमला किया है। अमेरिका की सेंट्रल कमांड की ओर से कहा गया है कि ईरान के हमले के जवाब में उसने कार्रवाई की है। असल में ईरान ने कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमला किया। कुवैत पर ईरान के इस हमले का चौतरफा विरोध हुआ है। गल्फ कोऑपरेशन से लेकर दूसरे कई देशों ने इसकी निंदा की है। हालांकि ईरान का कहना है कि अमेरिका की कार्रवाई के विरोध में क्षेत्रीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने का उसे अधिकार है। बहरहाल, अमेरिका ने कहा कि उसने ईरान के गोरुक और...

  • ईरान-अमेरिका समझौते में देरी

    नई दिल्ली। अमेरिका के बाद अब ईरान ने भी कहा है कि युद्धविराम के लिए तैयार मसौदा अभी फाइनल नहीं हुआ है। इससे पहले खबर आई थी कि मसौदा तैयार हो गया है और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार हो रहा है। हालांकि अमेरिका ने इससे इनकार कर दिया था। अब ईरान ने भी कहा है कि समझौता फाइनल नहीं हुआ है। ईरानी मीडिया के मुताबिक हाल के दिनों में मसौदे में बदलवा किए गए हैं। ईरानी अधिकारियों के हवाले से खबर आई है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर मीडिया में आई...

  • पश्चिम एशिया शांत नहीं हुआ तो क्या होगा

    भारत का मुश्किल समय गंभीर होता हुआ है। खास कर आर्थिक मोर्चे पर भारत की स्थिति बिगड़ने वाली है। महंगाई बेकाबू होगी, शेयर बाजार में बनाई गई कृत्रिम तेजी ठंडी पड़ेगी, रुपया और गिरेगा, जिससे भारत का मुद्रा बाजार तेजी से खाली होगा। इसका बड़ा असर यह संभव है कि महंगाई बढ़ेगी और महंगाई बढ़ेगी तो अनिवार्य रूप से रिजर्व बैंक को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी होगी, जिससे विकास दर कम होगी। अभी ही अर्थव्यवस्था की हालत देखते हुए संस्थागत विदेशी निवेशक यानी एफआईआई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक यानी एफपीआई अपना पैसा शेयर बाजार से निकाल कर रहे हैं।...

  • ट्रंप ने हमला टाला, ईरान सुपारी दे रहा

    नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले का फैसला टाल दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को ईरान पर बड़ा हमला करने का ऐलान किया था। लेकिन बाद में उन्होंने कई खाड़ी देशों का नाम लेते हुए कहा कि उनके कहने पर हमला टाल दिया है। दूसरी ओर ईरान संसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुपारी जारी कर रही है। बताया जा रहा है कि ईरान की संसद में ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या करने वालों को पांच सौ करोड़ रुपए से ज्यादा इनाम देने वाला बिल लाया जा सकता...

  • फिर जंग की लपटें

    ईरान की शर्तें मानना अमेरिका के लिए अपनी हार स्वीकार करने जैसा होगा। ट्रंप ने इससे इनकार करते हुए प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू किया। मगर उसके दबाव में आने के बजाय ईरान ने जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका/ इजराइल और ईरान के बीच युद्धविराम लगभग भंग हो चुका है। इसके टूटने की शुरुआत कब हुई और इसे किसने तोड़ा, इन प्रश्नों पर दोनों पक्षों की राय परस्पर विरोधी है। ईरान की दलील है कि आठ अप्रैल को लड़ाई ठहरने के बाद अमेरिका ने होरमुज जलडमरूमध्य की घेराबंदी कर युद्धविराम को पहली बार भंग किया। फिर तीन मई डॉनल्ड ट्रंप...

  • आर्थिकी के खोखे का सकंट काउंटडाउन!

    अमेरिका-ईरान की जंग का आज साठवां दिन है। मैंने पहले दिन ही ‘कितने सप्ताह, कितने महीने चलेगी लड़ाई’ का सिनेरियो बताया था। उसके दो महिने बाद शुक्रवार सुबह ईरान के नए अयातुल्लाह का बयान था कि हमसे अमेरिका की ‘शर्मनाक हार’ हुई है। वहीं ट्रंप ने आगे के सैनिक ऑपरेशन के विकल्पों पर विचार किया तो होर्मुज़ खाड़ी की नाकेबंदी जारी रखने की घोषणा भी की। ट्रंप ने ईरान की संवर्धित यूरेनियम व मिसाइल उत्पादन क्षमता को मिटाने का उद्देश्य बताया। सो, तय है ट्रंप और ईरान अड़े रहेंगे। यूक्रेन-रूस के गतिरोध जैसी लंबी स्थिति। आज खबर थी कि पाकिस्तान...

  • ईरान की शक्ति बनाम अमेरिका का खोखलापन!

    आदर्श स्थिति वह होगी, जब व्यक्ति को सारी स्वतंत्रताएं एवं अधिकार एक साथ प्राप्त हों। मगर दुनिया में अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनी, जो यह सब सुनिश्चित कर सके। इस लिहाज से अब तक तमाम राजसत्ताएं एक किस्म की सौदेबाजी (trade-off) का उपकरण रही हैं। पलड़ा उन तबकों के हित में झुक जाता है, जिनका राजसत्ता पर नियंत्रण होता है। गुजरे 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के अवैध हमले से शुरू हुई जंग में ईरान ने रणनीतिक विजय हासिल कर ली है, दुनिया का शायद ही कोई गंभीर विश्लेषक अब इस बात से असहमत होगा। ऐसा नहीं...

  • विराम के बाद युद्ध?

    अमेरिका ने ऐसा रुख अपनाया है, जैसे दोनों पक्षों के बीच युद्ध कभी हुआ ही नहीं हो! उधर ईरान का नजरिया है कि 39 दिन के युद्ध ने समीकरण बदल दिए हैं और वह अपनी बात मनवाने की स्थिति में है। ईरान और अमेरिका/ इजराइल के शांति समझौते की दिशा में बढ़ने की जागी उम्मीद पर जल्द ही पानी फिर गया। ईरान के होरमुज डलडमरूमध्य को फिर से बंद करने के बाद अब दोनों तरफ से मोर्चाबंदी तेज होने की खबरें हैं। लेबनान में युद्धविराम लागू होने और उसके बाद ईरान के होरमुज जल मार्ग को खोलने का एलान करते...

  • नए युग के द्वार पर खड़ी है दुनिया

    तेल और गैस की कीमतें विश्व बाजार से जुड़ी हुई हैं। अमेरिका में तेल और गैस का स्वामित्व निजी क्षेत्र की कंपनियों के पास है। अतः आपूर्ति घटने की स्थिति में उनका मुनाफा तो बढ़ेगा, लेकिन ऐसा आम अमेरिकी उपभोक्ता की कीमत पर होगा।  यही वो गंभीर स्थिति है, जिस वजह से ट्रंप ईरान युद्ध से निकलने का रास्ता ढूंढने के लिए बेताब नजर आए हैं। लेकिन ईरान इसका आसान रास्ता देने को तैयार नहीं है। समाजशास्त्री नेल बोनिला ने अपने एक ताजा आलेख में कहा है कि ‘पुरानी व्यवस्था अपने पक्ष में समग्र वैचारिक या राजनीतिक सर्व-सहमति निर्मित करने...

  • देश का पूरा विमर्श बदल गया

    दुनिया में इस समय चर्चा हो रही है कि पश्चिम एशिया का संकट कैसे दूर हो, तेल और गैस की सप्लाई कैसे सुचारू बने, होर्मुज की खाड़ी कैसे खुले, ऊर्जा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए, महंगाई कैसे रोकी जाए खास कर खाने पीने की चीजों, उर्वरक, प्लास्टिक के उत्पाद, केमिकल और दवाओं आदि। लेकिन भारत में क्या चर्चा है, लोकसभा में कितनी सीटें बढ़ेंगी, महिलाओं को आरक्षण मिलेगा तो क्या बदलेगा, विधानसभाओं के आकार बढ़ाने होंगे, जनगणना के बिना परिसीमन होगा आदि आदि। इससे बात बचती है तो पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव की चर्चा होती है। इस बीच...

  • चालीस दिन की जंग से अमेरिका को क्या मिला?

    पश्चिम एशिया में जंग थम गई है। 40 दिन के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हुआ है। हालांकि इजराइल इससे खुश नहीं है लेकिन अमेरिका के तैयार हो जाने के बाद उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था। अब सवाल है कि यह सिर्फ अस्थायी युद्धविराम है या अगले दो हफ्तों में जो बातचीत होगी, उससे युद्ध पर पूर्णविराम लग जाएगा? इसका एक जवाब यह है कि अगर वार्ता बीच में नहीं टूटी और दो हफ्ते तक पूर्ण युद्धविराम रहा तो यह युद्ध थम जाएगा। ऐसा मानने का कारण यह है कि अगर अमेरिका और इजराइल को युद्ध...

  • भारत सहित पूरी दुनिया ने स्वागत किया

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जंग थमने का भारत सहित पूरी दुनिया ने स्वागत किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार, आठ अप्रैल को एक बयान जारी करके कहा कि यह कदम पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में अहम साबित हो सकता है। बयान में कहा गया कि भारत पहले भी लगातार यह जोर देता रहा है कि तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के जरिए ही इस संघर्ष को खत्म किया जा सकता है। भारत ने उम्मीद जताई कि होर्मुज की खाड़ी के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहेगी। युद्धविराम...

  • ये कैसी ज़ुबां?

    अमेरिका और इजराइल ने जो युद्ध शुरू किया, उसके और उलझते जाने के ही संकेत हैं। इससे फिर यह जाहिर हुआ है कि युद्ध शुरू करना भले आसान हो, लेकिन उससे निकलना हमलावर देश के भी हाथ में नहीं रह जाता। डॉनल्ड ट्रंप ईरान के लिए अश्लील गाली-गलौच की हद तक उतर आए हैं। ऐसी धमकियां तो वे पहले से दे रहे हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय संधियों और नियमों के तहत युद्ध अपराध माना जाएगा। बहरहाल, रविवार को ईरान को नेस्तनाबूद करने की धमकी देने के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने ये कथित राज़ भी खोला कि ईरान से अच्छी बातचीत...

  • बदली हुई दुनिया में भारत

    अपनी अल्प-दृष्टि के कारण भारत के शासकों ने ताकत निर्माण के बजाय शक्ति प्रदर्शन को तरजीह दी, जिसने भारत को विश्व मंच पर आज अलग-थलग खड़ा कर दिया है। अगर शक्ति अपनी हो, तो उसके प्रदर्शन में कोई बुराई नहीं होती। लेकिन किसी अन्य ताकतवर से जुड़ कर उसे अपनी शक्ति मान लेना हमेशा हानिकारक होता है। नरेंद्र मोदी सरकार इसी रास्ते पर चली। अमेरिका से जुड़ने और इजराइल को प्राथमिकता देने की नीतियां संभवतः इसी सोच पर आधारित थीं। ईरान पर हमला कर अपनी वैश्विक प्रभुता को जताने का अमेरिका का दांव उलटा पड़ चुका है। देखते-देखते यह युद्ध...

  • आर-पार की लड़ाई

    संभवतः पाकिस्तान ने इस सोच के साथ मध्यस्थ बनना स्वीकार किया था कि अमेरिका की शर्तें ही वार्ता का आधार बनेंगी, जिन पर ले-देकर सहमति बन जाएगी। लेकिन ईरान के इरादे अलग हैं। वह आर-पार की लड़ाई के मूड में है। पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म कराने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता किसी नतीजे पर पहुंचती नहीं दिखती। अमेरिका की शर्तें उसने ईरान को बताईं, मगर ईरान ने उसे ठुकराते हुए अपनी जवाबी मांग पाकिस्तान को बता दी। पाकिस्तान उस पर अमेरिका से बातचीत करने की हैसियत में है या नहीं, यह नहीं मालूम। मगर इस बीच उसने अपने यहां...

  • स्पेन के बाद इटली ने दिया अमेरिका को झटका

    नई दिल्ली। स्पेन के बाद यूरोप के एक और बड़े देश ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकाने के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इटली ने अमेरिका को अपने सिगोनेला सैन्य ठिकाने का इस्तेमाल करने से रोक दिया। यह सैन्य ठिकाना सिसिली द्वीप पर है। बताया जा रहा है कि अमेरिका इस सैन्य ठिकाने पर विमान उतरना चाहता था, लेकिन इटली ने इजाजत नहीं दी। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है, अमेरिका के कुछ बॉम्बर विमान इटली के इस बेस पर उतरकर आगे मध्य पूर्व जाना चाहते थे। लेकिन इटली को इस योजना की पहले से कोई...

  • ईरान जंग का संकट और भारत की भूमिका

    पश्चिम एशिया की जंग भारत के नजदीक आती जा रही है। ईरान और अमेरिका या इजराइल के मिसाइल भले भारत की सीमा के आसपास नहीं गिर रहे हैं लेकिन ईरान या इजराइल या खाड़ी के किसी भी देश में गिरने वाली मिसाइल या ड्रोन का हमला भारत के हितों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में आ रही है तो खाद्यान्न सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। भूराजनीति में एक बड़ी शक्ति के रूप में भारत की मौजूदगी की धारणा भी इससे प्रभावित हो रही है। इसका कारण यह है कि पश्चिम एशिया...

  • ईरान समझौते की भीख मांग रहा है- ट्रंप

    नई दिल्ली। ईरान ने भले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया और किसी किस्म के युद्धविराम से इनकार किया है लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप लगातार एक ही बात दोहरा रहे हैं। अब उन्होंने कहा है कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की भीख मांग रहा है। हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि ईरान इस बात को कहने से डर रहा है। गौरतलब है कि ट्रंप सरकार की ओर से ईरान को 15 सूत्री प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए भेजा गया है। ईरान ने इसे एकतरफा बताते...

  • युद्ध के लिए दो लाख करोड़ और चाहिए

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को ईरान के खिलाफ जंग जारी रखने के लिए करीब दो लाख करोड़ रुपए की और जरुरत है। अभी तक अमेरिका डेढ़ लाख करोड़ रुपए के आसपास खर्च कर चुका है। चूंकि ईरान युद्ध उसके अनुमान से ज्यादा लंबा खींच रहा है इसलिए युद्ध महंगा होता जा रहा है और अमेरिका को और पैसे की जरुरत है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन को इस जंग को जारी रखने के लिए करीब दो सौ अरब डॉलर यानी एक लाख 85 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ सकती है। यह...

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