Iran US war

  • विराम के बाद युद्ध?

    अमेरिका ने ऐसा रुख अपनाया है, जैसे दोनों पक्षों के बीच युद्ध कभी हुआ ही नहीं हो! उधर ईरान का नजरिया है कि 39 दिन के युद्ध ने समीकरण बदल दिए हैं और वह अपनी बात मनवाने की स्थिति में है। ईरान और अमेरिका/ इजराइल के शांति समझौते की दिशा में बढ़ने की जागी उम्मीद पर जल्द ही पानी फिर गया। ईरान के होरमुज डलडमरूमध्य को फिर से बंद करने के बाद अब दोनों तरफ से मोर्चाबंदी तेज होने की खबरें हैं। लेबनान में युद्धविराम लागू होने और उसके बाद ईरान के होरमुज जल मार्ग को खोलने का एलान करते...

  • नए युग के द्वार पर खड़ी है दुनिया

    तेल और गैस की कीमतें विश्व बाजार से जुड़ी हुई हैं। अमेरिका में तेल और गैस का स्वामित्व निजी क्षेत्र की कंपनियों के पास है। अतः आपूर्ति घटने की स्थिति में उनका मुनाफा तो बढ़ेगा, लेकिन ऐसा आम अमेरिकी उपभोक्ता की कीमत पर होगा।  यही वो गंभीर स्थिति है, जिस वजह से ट्रंप ईरान युद्ध से निकलने का रास्ता ढूंढने के लिए बेताब नजर आए हैं। लेकिन ईरान इसका आसान रास्ता देने को तैयार नहीं है। समाजशास्त्री नेल बोनिला ने अपने एक ताजा आलेख में कहा है कि ‘पुरानी व्यवस्था अपने पक्ष में समग्र वैचारिक या राजनीतिक सर्व-सहमति निर्मित करने...

  • देश का पूरा विमर्श बदल गया

    दुनिया में इस समय चर्चा हो रही है कि पश्चिम एशिया का संकट कैसे दूर हो, तेल और गैस की सप्लाई कैसे सुचारू बने, होर्मुज की खाड़ी कैसे खुले, ऊर्जा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए, महंगाई कैसे रोकी जाए खास कर खाने पीने की चीजों, उर्वरक, प्लास्टिक के उत्पाद, केमिकल और दवाओं आदि। लेकिन भारत में क्या चर्चा है, लोकसभा में कितनी सीटें बढ़ेंगी, महिलाओं को आरक्षण मिलेगा तो क्या बदलेगा, विधानसभाओं के आकार बढ़ाने होंगे, जनगणना के बिना परिसीमन होगा आदि आदि। इससे बात बचती है तो पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव की चर्चा होती है। इस बीच...

  • चालीस दिन की जंग से अमेरिका को क्या मिला?

    पश्चिम एशिया में जंग थम गई है। 40 दिन के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हुआ है। हालांकि इजराइल इससे खुश नहीं है लेकिन अमेरिका के तैयार हो जाने के बाद उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा था। अब सवाल है कि यह सिर्फ अस्थायी युद्धविराम है या अगले दो हफ्तों में जो बातचीत होगी, उससे युद्ध पर पूर्णविराम लग जाएगा? इसका एक जवाब यह है कि अगर वार्ता बीच में नहीं टूटी और दो हफ्ते तक पूर्ण युद्धविराम रहा तो यह युद्ध थम जाएगा। ऐसा मानने का कारण यह है कि अगर अमेरिका और इजराइल को युद्ध...

  • भारत सहित पूरी दुनिया ने स्वागत किया

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जंग थमने का भारत सहित पूरी दुनिया ने स्वागत किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार, आठ अप्रैल को एक बयान जारी करके कहा कि यह कदम पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में अहम साबित हो सकता है। बयान में कहा गया कि भारत पहले भी लगातार यह जोर देता रहा है कि तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति के जरिए ही इस संघर्ष को खत्म किया जा सकता है। भारत ने उम्मीद जताई कि होर्मुज की खाड़ी के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री आवाजाही बिना किसी बाधा के जारी रहेगी। युद्धविराम...

  • ये कैसी ज़ुबां?

    अमेरिका और इजराइल ने जो युद्ध शुरू किया, उसके और उलझते जाने के ही संकेत हैं। इससे फिर यह जाहिर हुआ है कि युद्ध शुरू करना भले आसान हो, लेकिन उससे निकलना हमलावर देश के भी हाथ में नहीं रह जाता। डॉनल्ड ट्रंप ईरान के लिए अश्लील गाली-गलौच की हद तक उतर आए हैं। ऐसी धमकियां तो वे पहले से दे रहे हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय संधियों और नियमों के तहत युद्ध अपराध माना जाएगा। बहरहाल, रविवार को ईरान को नेस्तनाबूद करने की धमकी देने के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने ये कथित राज़ भी खोला कि ईरान से अच्छी बातचीत...

  • बदली हुई दुनिया में भारत

    अपनी अल्प-दृष्टि के कारण भारत के शासकों ने ताकत निर्माण के बजाय शक्ति प्रदर्शन को तरजीह दी, जिसने भारत को विश्व मंच पर आज अलग-थलग खड़ा कर दिया है। अगर शक्ति अपनी हो, तो उसके प्रदर्शन में कोई बुराई नहीं होती। लेकिन किसी अन्य ताकतवर से जुड़ कर उसे अपनी शक्ति मान लेना हमेशा हानिकारक होता है। नरेंद्र मोदी सरकार इसी रास्ते पर चली। अमेरिका से जुड़ने और इजराइल को प्राथमिकता देने की नीतियां संभवतः इसी सोच पर आधारित थीं। ईरान पर हमला कर अपनी वैश्विक प्रभुता को जताने का अमेरिका का दांव उलटा पड़ चुका है। देखते-देखते यह युद्ध...

  • आर-पार की लड़ाई

    संभवतः पाकिस्तान ने इस सोच के साथ मध्यस्थ बनना स्वीकार किया था कि अमेरिका की शर्तें ही वार्ता का आधार बनेंगी, जिन पर ले-देकर सहमति बन जाएगी। लेकिन ईरान के इरादे अलग हैं। वह आर-पार की लड़ाई के मूड में है। पश्चिम एशिया में युद्ध खत्म कराने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता किसी नतीजे पर पहुंचती नहीं दिखती। अमेरिका की शर्तें उसने ईरान को बताईं, मगर ईरान ने उसे ठुकराते हुए अपनी जवाबी मांग पाकिस्तान को बता दी। पाकिस्तान उस पर अमेरिका से बातचीत करने की हैसियत में है या नहीं, यह नहीं मालूम। मगर इस बीच उसने अपने यहां...

  • स्पेन के बाद इटली ने दिया अमेरिका को झटका

    नई दिल्ली। स्पेन के बाद यूरोप के एक और बड़े देश ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकाने के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इटली ने अमेरिका को अपने सिगोनेला सैन्य ठिकाने का इस्तेमाल करने से रोक दिया। यह सैन्य ठिकाना सिसिली द्वीप पर है। बताया जा रहा है कि अमेरिका इस सैन्य ठिकाने पर विमान उतरना चाहता था, लेकिन इटली ने इजाजत नहीं दी। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है, अमेरिका के कुछ बॉम्बर विमान इटली के इस बेस पर उतरकर आगे मध्य पूर्व जाना चाहते थे। लेकिन इटली को इस योजना की पहले से कोई...

  • ईरान जंग का संकट और भारत की भूमिका

    पश्चिम एशिया की जंग भारत के नजदीक आती जा रही है। ईरान और अमेरिका या इजराइल के मिसाइल भले भारत की सीमा के आसपास नहीं गिर रहे हैं लेकिन ईरान या इजराइल या खाड़ी के किसी भी देश में गिरने वाली मिसाइल या ड्रोन का हमला भारत के हितों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में आ रही है तो खाद्यान्न सुरक्षा भी प्रभावित हो रही है। भूराजनीति में एक बड़ी शक्ति के रूप में भारत की मौजूदगी की धारणा भी इससे प्रभावित हो रही है। इसका कारण यह है कि पश्चिम एशिया...

  • ईरान समझौते की भीख मांग रहा है- ट्रंप

    नई दिल्ली। ईरान ने भले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दिए गए 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को ठुकरा दिया और किसी किस्म के युद्धविराम से इनकार किया है लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप लगातार एक ही बात दोहरा रहे हैं। अब उन्होंने कहा है कि ईरान युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की भीख मांग रहा है। हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि ईरान इस बात को कहने से डर रहा है। गौरतलब है कि ट्रंप सरकार की ओर से ईरान को 15 सूत्री प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए भेजा गया है। ईरान ने इसे एकतरफा बताते...

  • युद्ध के लिए दो लाख करोड़ और चाहिए

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को ईरान के खिलाफ जंग जारी रखने के लिए करीब दो लाख करोड़ रुपए की और जरुरत है। अभी तक अमेरिका डेढ़ लाख करोड़ रुपए के आसपास खर्च कर चुका है। चूंकि ईरान युद्ध उसके अनुमान से ज्यादा लंबा खींच रहा है इसलिए युद्ध महंगा होता जा रहा है और अमेरिका को और पैसे की जरुरत है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन को इस जंग को जारी रखने के लिए करीब दो सौ अरब डॉलर यानी एक लाख 85 हजार करोड़ रुपए के अतिरिक्त फंड की जरूरत पड़ सकती है। यह...

  • जंग के विरोध में अमेरिकी अधिकारी का इस्तीफा

    नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ चल रही जंग को लेकर अमेरिका में विरोध बढ़ता जा रहा है। अब अमेरिका के टॉप काउंटरटेररिज्म अधिकारी जो केंट ने इस जंग को लेकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि वे इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते। जो केंट ने साफ कहा कि ईरान से अमेरिका को तुरंत कोई खतरा नहीं था। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति नहीं थी कि युद्ध जरूरी हो। गौरतलब है कि जो केंट की नियुक्ति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। केंट ने आरोप लगाया है कि इजराइल के दबाव में आकर राष्ट्रपति ट्रंप ने...

  • भारत को सिर्फ अपने हित साधने

    संदेह नहीं कि अमेरिका-इजराइल और ईरान अपने अपने उद्देश्यों को साधने में लगे है, जिसपर वैश्विक शांति, स्थिरता, नैतिकता, लोकतंत्र और मानवता का दिखावा रूपी मुलम्मा चढ़ाया जा रहा है। भारत के लिए सबसे समझदारी भरा रास्ता यही है कि वह राष्ट्रहितों, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को ऊपर रखे। यही व्यवहारिक और जिम्मेदार कूटनीति है। पश्चिमी एशिया भीषण युद्ध की आग में धधक रहा है। एक ओर इजराइल-अमेरिका का गठबंधन है, तो दूसरी ओर ईरान, जिसे प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से रूस और चीन की रणनीतिक सहानुभूति प्राप्त है। सभी पक्षों से भारत के कूटनीतिक-व्यापारिक संबंध हैं। ऐसे में भारत...

  • युद्धः नौ दिन बाद

    अमेरिका- इजराइल और ईरान का युद्ध किसी एक पक्ष की लड़ सकने की क्षमता चूकने जारी रहने की आशंका गहरी होती चली गई है। इसीलिए इसके संभावित आर्थिक एवं भू-राजनीतिक परिणामों को लेकर अब दुनिया चिंतित नजर आ रही है। ईरान पर अमेरिका- इजराइल के साझा हमले के बाद पहले नौ दिन में जाहिर हुआ है कि ये जंग दूसरे विश्व युद्ध के बाद तमाम अमेरिकी युद्धों से कई मामलों में अलग है। आठ दशक में पहली बार हुआ है, जब किसी देश ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को इतने व्यापक रूप से और इतनी गहराई तक जाकर निशाना बनाया हो।...

  • ईरान ने यूएस का बड़ा नुकसान किया

    नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल के हमले के आठवें दिन भी ईरान मैदान में डटा हुआ है और उसने अमेरिका के सैन्य ठिकाने पर हमला करके उसे बड़ा नुकसान किया है। जंग के आठवें दिन खबर आई कि ईरान ने पिछले एक हफ्ते में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में तैनात अमेरिका के टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस यानी थाड सिस्टम को निशाना बनाया है। खबरों के मुताबिक इन हमलों में जॉर्डन के ‘मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस’ पर लगे थाड का रडार सिस्टम तबाह हो गया है। एक थाड सिस्टम की कीमत 22 हजार करोड़ रुपए तक होती...

  • युद्ध का भारत पर बड़ा असर होगा

    ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले में भारत पक्षकार नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युद्ध शुरू होने से दो दिन पहले जरूर इजराइल की यात्रा पर गए थे। लेकिन भारत इस सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं है। इसके बावजूद इस युद्ध का बड़ा असर भारत के ऊपर होगा। भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा दोनों पर व्यापक असर होगा तो साथ ही खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय कामगारों और पेशेवरों द्वारा भेजे जाने वाले रेमिटेंसेज यानी उनके पैसे पर भी असर होगा। इसके अलावा भारत की कूटनीति और सामरिक नीति भी प्रभावित होगी। सवाल है कि क्या...

  • अमेरिकी शर्तों पर खत्म होगा युद्ध

    नई दिल्ली। ईरान पर हमले के तीसरे दिन अमेरिका के रक्षा और युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि अमेरिका की शर्तों पर युद्ध खत्म होगा। अमेरिका की क्या शर्तें होंगी, यह उन्होंने नहीं बताया लेकिन रक्षा मुख्यालय पेंटागन की प्रेस ब्रीफिंग में हेगसेथ ने कहा कि ‘अमेरिका फर्स्ट’ की शर्त पर युद्ध खत्म होगा। उन्होंने कहा कि यह युद्ध अमेरिका ने नहीं शुरू किया है लेकिन खत्म अमेरिका करेगा। हेगसेथ ने यह भी कहा कि यह इराक नहीं है। यहां अंतहीन युद्ध नहीं चलेगा। गौरतलब है कि इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि युद्ध चार...

और लोड करें