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ये कैसी ज़ुबां?

अमेरिका और इजराइल ने जो युद्ध शुरू किया, उसके और उलझते जाने के ही संकेत हैं। इससे फिर यह जाहिर हुआ है कि युद्ध शुरू करना भले आसान हो, लेकिन उससे निकलना हमलावर देश के भी हाथ में नहीं रह जाता।

डॉनल्ड ट्रंप ईरान के लिए अश्लील गाली-गलौच की हद तक उतर आए हैं। ऐसी धमकियां तो वे पहले से दे रहे हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय संधियों और नियमों के तहत युद्ध अपराध माना जाएगा। बहरहाल, रविवार को ईरान को नेस्तनाबूद करने की धमकी देने के कुछ ही घंटों बाद उन्होंने ये कथित राज़ भी खोला कि ईरान से अच्छी बातचीत हुई है, जिससे युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। मगर ऐसे बयान इतनी बार दोहराए गए हैं कि उनसे अमेरिका के शेयर बाजारों का भी भरोसा टूटने लगा है, जिन्हें संभाले रखने की कोशिश में ट्रंप का अंदाज बेहद गरमाने के बाद उतनी ही तेजी से ठंडा हो जाता है!

इस बीच अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर जो युद्ध शुरू किया, उसके और उलझते जाने के ही संकेत हैं। इससे फिर ये बात जाहिर हुई है कि युद्ध शुरू करना भले आसान हो, लेकिन उससे निकलना हमलावर देश के भी हाथ में नहीं रह जाता। युद्ध का अपना गतिशास्त्र होता है और उसने मौजूदा लड़ाई को अपने तर्कजाल में फंसा लिया है। इस दौरान ईरान में बड़े पैमाने पर बर्बादियां हुई हैं, मगर अमेरिका को हुए नुकसान को देखकर दुनिया चकित है। ईरान के इस्फहान इलाके में मार गिराए गए एफ-16 विमान के पायलट को बचाने की कोशिश में अमेरिका को अनेक विमान और हेलीकॉप्टरों का नुकसान झेलना पड़ा।

उससे संकेत मिला कि ईरान पर जमीनी हमला करना कितना जोखिम भरा होगा। जबकि ऐसे हमले के बिना ईरान को परास्त करना हर रोज अधिक कठिन नज़र आने लगा है। इस बीच अमेरिकी मीडिया में अमेरिका को हो रहे सैन्य एवं आर्थिक नुकसानों की खबरें सुर्खियों में हैं। युद्ध शुरू करने के पीछे ट्रंप परिवार और उनके मंत्रियों के निहित स्वार्थ की चर्चाएं भी खुलकर हो रही हैं। नतीजा है देश के अंदर इस युद्ध का लगातार अधिक अलोकप्रिय होते जाना। इसके दबाव में ट्रंप युद्ध से निकलने का ऐसा तरीका चाहते हैं, जिसे वे अपनी जीत बता सकें। मगर ईरान का नेतृत्व उन्हें ऐसा रास्ता मुहैया कराने को तैयार नहीं है। इससे व्यग्र हुए ट्रंप ने भाषा की शालीनता भी छोड़ दी है।

By NI Editorial

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