नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों रेजीनगर और नंदीग्राम पर उपचुनाव की घोषणा के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव में नामांकन की अवधि समाप्त होने से पहले तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह का विवाद सुलझाने के लिए चुनाव आयोग ने पार्टी के दोनों खेमों के नेताओं को बुलाया था। ऋतब्रत बनर्जी और ममता बनर्जी दोनों गुट के नेताओं ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखा।
शनिवार को पहले ऋतब्रत बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के सामने मौखिक दलीलें दीं और सवालों के जवाब दिए। आयोग ने उनसे दिन खत्म होने से पहले अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने को कहा। गौरतलब है कि छह अक्टूबर को रेजीनगर और नंदीग्राम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। उससे पहले नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 16 सितंबर है। दलबदल करने वाला गुट उससे पहले चुनाव चिन्ह पर फैसला चाहता है।
बहरहाल, शनिवार को ही ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रतिनिधि भी चुनाव आयोग से मिले। उनके पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में डेरेक ओ’ब्रायन, कल्याण बनर्जी, सागरिका घोष, साकेत गोखले और वकील अभिनव सिंह शामिल थे। उन्होंने अपने को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा किया। अगर 16 सितंबर तक चुनाव आयोग किसी एक गुट को मान्यता नहीं देता है, तो दोनों गुटों के उम्मीदवारों को स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना पड़ सकता है। चुनाव आयोग पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह जब्त कर सकता है।
