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खड़गे ने खड़ा किया नया विवाद

New Delhi, Aug 07 (ANI): Rajya Sabha LoP Mallikarjun Kharge speaks in the house during the Monsoon Session of Parliament, in New Delhi on Thursday. (Sansad TV/ANI Video Grab)

नई दिल्ली। पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रीवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ पर चर्चा के दौरान लोकसभा में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने बिल से अलग हट कर दूसरे मुद्दों पर विवाद खड़ा किया था। वैसे ही राज्यसभा में इस बिल पर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे ने अलग विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने मनुस्मृति और शूद्र के पढ़ने का अधिकार छीनने का मुद्दा उठा दिया। उनके इस बयान पर उच्च सदन में काफी देर तक विवाद हुआ।

पेपर लीक के खिलाफ बिल पर बोलते हुए खड़गे ने शैक्षणिक संस्थाओं पर आरएसएस के नियंत्रण का दावा किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति मानने वाले बढ़ गए हैं, इससे शूद्र को पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। जेपी नड्डा ने टोकते हुए कहा कि खड़गे का बयान तथ्यों से परे है। इससे अशांति फैल सकती है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मनुस्मृति वाला बयान रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।

मल्लिकार्जुन खड़गे की बातों का उच्च सदन में भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने जवाब दिया। उन्होंने बताया कि 1790 में पहली बार मनुस्मृति का अंग्रेजी में अनुवाद हुआ। सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि मनुस्मृति में जो शूद्र की अवधारणा है वह आज की अवधारणा से काफी भिन्न है। बहरहाल, खड़गे ने जो विवाद खड़ा किया वह संसद से बाहर और सोशल मीडिया में भी चर्चा में है।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने पेपर लीक के खिलाफ लाया गया बिल पेश किया। इसे लोकसभा से पास किया जा चुका है। लोकसभा में मंगलवार को नौ घंटे और बुधवार को सात घंटे तक इस पर बहस हुई थी। गुरुवार को राज्यसभा में इस पर चर्चा को दौरान खड़गे ने कहा कि सरकार को छात्रों के आंदोलन और जनदबाव के आगे झुकना पड़ा। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को हटाना और संशोधन बिल लाना छात्रों के हित में नहीं, बल्कि सरकार की कुर्सी बचाने की मजबूरी थी। खड़गे ने यह भी कहा कि सिर्फ सजा बढ़ाने या स्पेशल टास्क फोर्स बनाने या फास्ट ट्रैक कोर्ट से पेपर लीक नहीं रूक जाएगा।

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