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नेहरू और कांग्रेस पर मोदी का हमला

Dibrugarh [Assam], Dec 21 (ANI): Prime Minister Narendra Modi speaks during Bhoomi Poojan of urea plant of Assam Valley Fertiliser & Chemical Company Ltd. at Namrup, in Dibrugarh on Sunday. (DD News/ANI Video Grab)

राजकोट। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ पर मोहम्मद गजनवी के हमले के एक सौ हजार साल पूरे होने के बहाने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और आज की कांग्रेस को निशाना बनाया। उन्होंने नेहरू का नाम लिए बगैर कहा कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया गया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतें आज भी मौजूद हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री ने रविवार की सुबह मंदिर में पूजा अर्चना कीष

गौरतलब है कि मंदिर पर हमले के एक हजार साल होने पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है। इसे लेकर सद्भावना ग्राउंड में प्रधानमंत्री मोदी ने एक रैली को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हमले के वक्त आतताई सोच रहे थे कि वे जीत गए हैं, लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर में फहरा रही ध्वजा बता रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है। उन्होंने आगे कहा, ‘दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में वे ताकतें मौजूद हैं, जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था’।

प्रधानमंत्री मोदी ने नेहरू का नाम लिए बिना कहा, ‘जब सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई’। प्रधानमंत्री ने इशारों में यह भी कहा कि 1951 में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के शामिल होने को लेकर जवाहरलाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी। मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूर सद्भावना ग्राउंड में रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमें आज भी ऐसी ताकतों से सावधान रहना है, जो हमें बांटने की कोशिश में लगी हुई हैं’।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार की सुबह मंदिर में करीब आधे घंटे तक पूजा, अर्चना की। शिवलिंग पर जल चढ़ाया, फूल अर्पित किए और पंचामृत से अभिषेक किया। गौरतलब है कि मोदी शनिवार शाम सोमनाथ पहुंचे थे। अपने भाषण में मोदी ने कहा, ‘ये भी संयोग है कि आज सोमनाथ आक्रमण के एक हजार साल पूरे हो रहे हैं और अब इसके पुनर्निर्माण के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं। सोमनाथ को नष्ट करने के एक नहीं, अनेकों प्रयास हुए। विदेशी आक्रांताओं द्वारा कई सदियों तक भारत को खत्म करने की कोशिशें होती रहीं, लेकिन न ही सोमनाथ नष्ट हुआ, न ही भारत’।

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