Congress

  • कांग्रेस के सहयोगी क्यों खामोश हैं?

    यह हैरान करने वाली बात है कि चाहे आरक्षण को लेकर चल रही बहस हो या जाति जनगणना को लेकर उठाए जा रहे सवाल हों, कांग्रेस की सहयोगी पार्टियां इन पर पूरी तरह से खामोश हैं। यहां तक कि मंडल राजनीति से निकली समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल भी खामोश हैं। इक्का दुक्का नेताओं के बयानों के अलावा पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या किसी तरह के अभियान की घोषणा नहीं हुई है। इन दोनों मामलों में कांग्रेस अकेले लड़ रही है। मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने इसे मुद्दा बनाया है। यह नहीं कहा जा सकता...

  • आप से तालमेल किया तो डूबेगी कांग्रेस

    कांग्रेस पार्टी वही गलती करने जा रही है, जो उसने 2016 और 2021 के केरल व पश्चिम बंगाल चुनाव के समय किया था। कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में वामपंथी पार्टियों के साथ तालमेल कर लिया, जबकि केरल में उसे वामपंथी मोर्चे के खिलाफ लड़ना था। नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस दोनों चुनाव केरल में बुरी तरह से हारी। इसका कारण यह था कि कांग्रेस मतदाताओं को यकीन नहीं दिला सकी कि वह और वामपंथी पार्टियां अलग हैं। इसलिए लोकसभा में केरल के लोगों ने कांग्रेस को वोट किया और विधानसभा में लेफ्ट मोर्चा का। अभी पांच राज्यों में चुनाव होने...

  • हरियाणा भाजपा के कांग्रेस नेता परेशान हैं

    यह पूरे देश में हो रहा है कि कांग्रेस और दूसरी पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए नेता और भाजपा के पुराने नेता आपस में लड़ रहे हैं। कई राज्यों में खुल कर विवाद सामने आ गया है और कई राज्यों में यह अभी दबा हुआ है। हरियाणा में यह झगड़ा पिछले दिनों खुल कर दिखाई दिया। कांग्रेस से भाजपा में गए राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में आयोजित एक कार्यक्रम में पार्टी के नेताओं को खूब खरी खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम जहां हो रहा है वहां के स्थानीय नेताओं को बुलाना चाहिए और उन्हें महत्व देना चाहिए।...

  • कांग्रेस, सपा जल्दी बातचीत शुरू करेंगे

    कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सैद्धांतिक रूप से इस बात पर सहमत हो गए हैं कि दोनों मिल कर उत्तर प्रदेश का चुनाव लड़ेंगे। पिछली बार दोनों पार्टियां अलग अलग लड़ी थीं और कांग्रेस सिर्फ दो सीट पर सिमट गई। सपा की सीटें 2017 के 47 से बढ़ कर 111 हो गईं। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों साथ आए तो दोनों को फायदा हुआ। कांग्रेस एक से बढ़ कर छह हो गई तो सपा पांच से बढ़ कर 36 हो गई। उसके बाद से ही दोनों पार्टियां के तालमेल की चर्चा हो रही थी। अब कहा जा रहा है...

  • देश की सुध ले कांग्रेस?

    कांग्रेस को अपनी जिद और तुच्छ राजनीति छोड़ कर देश और समाज के व्यापक हित में सोचना चाहिए। अगर लोकसभा व विधानसभाओं में सीटें बढ़ती हैं और महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व मिलता है तो इससे लोकतंत्र मजबूत होगा। कांग्रेस सरकार का साथ देती है तब भी और नहीं देती है तब भी यह बदलाव होना है। आमतौर पर संसद के किसी भी सत्र में पहले हफ्ते विपक्षी पार्टियां शोर शराबा करती हैं और विवाद के तमाम मुद्दे उठा कर सरकार से जवाब मांगती है। उनके शोर शराबे की वजह से संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित होती है।...

  • कांग्रेस के प्रति क्या धारणा बदलेगी?

    नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में कांग्रेस को बुरी तरह हराने के बाद भी उसको उसके हाल पर नहीं छोड़ा। उलटे उसके बाद तो कांग्रेस और उसके भूत, वर्तमान और भविष्य के नेताओं की साख खराब करने का ज्यादा बड़ा और व्यवस्थित अभियान चला। भाजपा ने देश में व्यापक रूप से यह धारणा बनाई है कि कांग्रेस बहुत खराब पार्टी है, उसके पास देश के लिए कोई दृष्टि नहीं है और देश के लोग जो समस्याएं झेल रहे हैं उनके लिए जिम्मेदार कांग्रेस की पहले की सरकारें हैं। इस नैरेटिव को स्थापित करने के...

  • दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की लगातार दूसरी जीत

    मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट के उपचुनाव में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को पराजित कर सीट बरकरार रखी। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6016 मतों से शिकस्त दी। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अंतिम परिणाम के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 66,757 मत प्राप्त हुए, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 60,741 मत मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 6016 मत रहा। उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी (काशीराम) के प्रत्याशी दामोदर यादव 'मंडल' 22,527 मत प्राप्त कर तीसरे स्थान पर रहे। अन्य सभी प्रत्याशियों की...

  • भाजपा की उलटी रणनीति

    ऐसा लग रहा है कि भाजपा और उसकी सरकार आजकल जो भी रणनीति बनाती है वह उलटी पड़ रही है। सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से उठवाने की रणनीति हो या छात्रों पर लाठीचार्ज की रणनीति हो दोनों का उलटा असर हुआ है। ऐसे ही राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के खिलाफ भाजपा की ओर से राज्यों में कांग्रेस कार्यालयों पर प्रदर्शन की रणनीति भी उलटी पड़ती दिख रही है। इससे यह मैसेज जा रहा है कि भाजपा को अपने खिलाफ प्रदर्शन पसंद नहीं है और चाहे कितना भी बड़ा मुद्दा हो उस पर प्रदर्शन होगा...

  • दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर भड़की कांग्रेस, लोकतंत्र पर हमले का लगाया आरोप

    दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने और विपक्ष को डराने का प्रयास कर रही है। श्री खरगे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोग बिना किसी पहचान या बैज के पुलिस के बीच काम कर रहे हैं और अप्रत्यक्ष रूप से छात्रों तथा कांग्रेस नेताओं को डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार...

  • कांग्रेस इकोसिस्टम को अब भी भरोसा नहीं

    निर्भया कांड के 14 साल के बाद दिल्ली में फिर युवाओं का आक्रोश दिखा। हजारों की संख्या में छात्र व युवा सड़कों पर निकले। बारिश, पुलिस की लाठी, आंसू गैस के गोले और पानी की बौछारों की परवाह किए बगैर उन्होंने जंतर मंतर पर कब्जा किया। रविवार को पूरी रात वे वहां डटे रहे और सोमवार की सुबह संसद की ओर मार्च किया तो सरकार के हाथ पांव फूल गए। किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी संख्या में और इतने जज्बाती होकर युवा सरकार के खिलाफ आंदोलन करने निकलेंगे। पुलिस ने खूब लाठियां चलाईं और पिछले 14 साल...

  • कांग्रेस को चन्नी को साथ रखना होगा

    कांग्रेस ने पंजाब का विवाद कुछ हद तक सुलझा लिया है। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री और चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी के विरोधी अगर बहुत उछल कूद मचाएंगे या जीत का जश्न मनाएंगे तो कांग्रेस को उसका नुकसान होगा। यह सही है कि चन्नी ने ज्यादा बड़ा दांव खेल दिया था। वे चाहते थे कि उनको या तो प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए या मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किया जाए। कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं हुई क्योंकि सीएम रहते चन्नी को सीएम दावेदार पेश करके कांग्रेस ने पिछला चुनाव लड़ा था और उसे सिर्फ 18 सीटें मिली थीं।...

  • कांग्रेस की नजर उत्तराखंड पर

    यह सवाल बार बार पूछा जा रहा है कि राहुल गांधी आखिर छात्रों से जुड़ा कार्यक्रम करने के लिए उत्तराखंड क्यों गए? इसका जवाब यह है कि कांग्रेस की पैनी नजर उत्तराखंड पर है, जहां अगले साल के शुरू में चुनाव होने वाला है। कांग्रेस को लग रहा है कि अगले साल के शुरू में जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं उनमें उत्तर प्रदेश को छोड़ कर उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में कांग्रेस के लिए बहुत अच्छी संभावना है। तभी राहुल गांधी ने छात्रों के मामले में राजस्थान के बाद दूसरा मुकाम उत्तराखंड के देहरादून को...

  • कांग्रेस आलाकमान को वारिंग पर भरोसा

    राहुल गांधी पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदलने जा रहे हैं। उन्होंने दो टूक अंदाज में यह बात प्रभारी भूपेश बघेल को बता दी है और बघेल ने भी ऐसे ही साफ शब्दों में पंजाब कांग्रेस के बागी नेताओं यानी चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर रंधावा आदि को बता दिया है। तभी चन्नी और रंधावा गुट सीधे राहुल गांधी से मिलने का समय मांग रहा है। हालांकि लग नहीं रहा है कि राहुल उनसे मिलेंगे। सवाल है कि राहुल गांधी या प्रभारी भूपेश बघेल क्यों अमरिंदर सिंह राजा वारिंग पर इतना भरोसा कर रहे हैं? इसका सबसे बड़ा कारण तो यह...

  • संविधान संशोधन विधेयकों का विरोध करेगी कांग्रेस

    नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से संविधान संशोधन विधेयकों को पास कराने की तैयारियों और कई विपक्षी पार्टियों की ओर से सरकार का समर्थन किए जाने की खबरों के बीच कांग्रेस ने अपना स्टैंड साफ कर दिया है। कांग्रेस ने कहा है कि वह इन विधायकों का विरोध करेगी। सत्र से पहले गुरुवार को कांग्रेस के संसदीय रणनीति समूह की एक अहम बैठक सोनिया गांधी के आवास पर हुई। इसमें कांग्रेस ने तय किया कि वह मानसून सत्र में राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का मुद्दा उठाएगी। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 131वें संविधान...

  • पंजाब में कांग्रेस का सामूहिक नेतृत्व

    पंजाब में कांग्रेस पार्टी किसी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करके चुनाव नहीं लड़ने जा रही है। पार्टी ने ऐलान कर दिया है कि अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव राहुल गांधी के चेहरे पर लड़ा जाएगा। पहली बार ऐसा हुआ है कि कांग्रेस ने किसी चुनाव में राहुल गांधी के चेहरे पर लड़ने का ऐलान किया है। इससे पहले राष्ट्रीय चुनाव भी कांग्रेस राहुल के चेहरे पर नहीं लड़ी है। कांग्रेस ने प्रदेश नेताओं की खींचतान और बगावत की संभावना को देखते हुए राहुल गांधी के नाम का ऐलान किया है। कांग्रेस के इस ऐलान के बाद आम...

  • पंजाब में चन्नी नहीं कांग्रेस चेहरा?

    पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कांग्रेस आलाकमान को मुश्किल में डाला है। वे चाहते हैं कि पार्टी उनको या तो प्रदेश अध्यक्ष बनाए या मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करे। कांग्रेस इसके लिए तैयार नहीं है। वह किसी को भी चेहरा घोषित नहीं करना चाहती है क्योंकि कांग्रेस को जाट सिख और दलित दोनों के वोट चाहिए। दूसरी ओर पंजाब कांग्रेस की परंपरा रही है चुनाव जीतने पर प्रदेश अध्यक्ष को ही मुख्यमंत्री बनाया जाता है। इस सदी में कांग्रेस को दो बार सरकार बनाने का मौका मिला। दोनों बार कैप्टेन अमरिंदर सिंह मुख्यमंत्री बने और चुनाव से...

  • पंजाब में कांग्रेस का संतुलन का प्रयास

    कांग्रेस पार्टी ने पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले एक संतुलन बनाने का प्रयास किया है। आलाकमान की ओर से भेजे गए अजय माकन ने कुछ दिन पहले अपनी रिपोर्ट दी थी। उस रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस ने एक फॉर्मूला तैयार किया है, जिसमें जाट सिख और दलित का संतुलन बनाया गया है। हिंदू वोट के लिए कांग्रेस क्या करेगी यह देखने वाली बात होगी। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्य के प्रभारी हैं। बहरहाल, कांग्रेस ने तय किया है कि चुनाव से ठीक पहले प्रदेश अध्यक्ष बदलना ठीक नहीं होगा। इसलिए अमरिंदर सिंह वारिंग को अध्यक्ष बनाए...

  • गोवा में कांग्रेस सहयोगी खोज रही है

    गोवा में बहुत जल्दी चुनाव होने वाला है। अगर चुनाव समय पर हुआ तो अगले साल मार्च में होगा। हालांकि यह भी चर्चा है कि नवंबर में ही पांच राज्यों के चुनाव हो सकते हैं, जिनमें एक राज्य गोवा भी है। चुनाव से पहले कांग्रेस गोवा में सहयोगी तलाश रही है। कांग्रेस ने पिछले दिनों गिरीश चोडनकर को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। वे तमिलनाडु के प्रभारी थे। साथ ही कांग्रेस ने महाराष्ट्र के बड़े नेता माणिकराव ठाकरे को गोवा का प्रभारी बनाया है। अब खबर है कि कांग्रेस राज्य में सहयोगियों की तलाश कर रही है। ध्यान रहे गोवा में कई...

  • भारत में मुश्किल है दो दलीय व्यवस्था

    हो सकता है कि यह कांग्रेस के कुछ नेताओं की सदिच्छा हो या यह भी हो सकता है कि कांग्रेस से ज्यादा भाजपा, मीडिया के एक हिस्से और राइटविंग इकोसिस्टम की सदिच्छा हो कि प्रादेशिक पार्टियां समाप्त हो जाएं। लेकिन ऐसा होने की संभावना नहीं दिख रही है। हां, यह जरूर है कि प्रादेशिक पार्टियों के कमजोर होने से कांग्रेस की राजनीति थोड़ी मजबूत हो जाए। ध्यान रहे भाजपा के साथ वाली प्रादेशिक पार्टियां कमजोर नहीं हो रही हैं। एकाध अपवाद हो सकते हैं लेकिन भाजपा के साथ साथ उसकी सहयोगी पार्टियां भी मजबूत हुई हैं। दूसरी ओर भाजपा विरोधी...

  • भाजपा में अब कांग्रेस जैसी राजनीति

    भारतीय जनता पार्टी हमेशा कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा अनुशासित पार्टी रही है। पिछले 12 साल में नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने इस अनुशासन को और मजबूत किया। गोपनीयता का एक ऐसा ढांचा बनाया कि ज्यादातर फैसलों की जानकारी बड़े नेताओं तक को नहीं होती है। पार्टी के बाहर मीडिया को इस तरह से नियंत्रित किया कि सरकार और पार्टी के खिलाफ कोई भी खबर नहीं छपती है। अगर सचमुच की खबर होती भी है तो मीडिया के लोगों की जिम्मेदारी होती है कि वे इसके बचाव के तर्क खोजें और मामले को भटकाएं। लेकिन अचानक सारी चीजें बदल गई...

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