नई दिल्ली। ईरान पर अमरिका के हमले के बाद पहली बार ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई। हालांकि जंग शुरू होने के बाद एक बार जून में दोनों के बीच फोन पर बात हुई थी। सोमवार को किर्गिस्तान के बिश्केक में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई और दोपक्षीय वार्ता हुई। बैठक में पेजेशकियान ने मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति बहाली में भारत काफी मदद कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शांति और स्थिरता के सभी प्रयासों का भारत समर्थन करेगा।
वार्ता के दौरान पेजेशकियान ने कहा, ‘अमेरिका ने अपने वादे को पूरा नहीं किया इसके बावजूद ईरान एक अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है’। पेजेशकियान ने कहा, ‘इलाके में शांति और स्थिरता को मजबूत करने में भारत काफी मदद कर सकता है’। बाद में प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘बिश्केक में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात हुई। हमने ईरान के साथ भारत की पुरानी दोस्ती को अलग अलग क्षेत्रों में और मजबूत करने के अपने संकल्प को दोहराया’। उन्होंने आगे लिखा, ‘हम आने वाले समय में अपने व्यापार के दायरे को बढ़ाना और उसमें विविधता लाना चाहते हैं। हमने क्षेत्र के मौजूदा हालात पर चर्चा की। भारत स्थायी शांति सुनिश्चित करने की दिशा में की जा रही सभी कोशिशों का समर्थन करना जारी रखेगा’।
प्रधानमंत्री मोदी ने अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान से भी दोपक्षीय वार्ता की। पशिन्यान के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी और प्रधानमंत्री मोदी की पहली मुलाकात थी। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मा, माइनिंग, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर चर्चा की। पीएम पशिन्यान ने मोदी को आर्मेनिया, अजरबैजान शांति समझौते के लागू होने की मौजूदा स्थिति के बारे में जानकारी दी। इस दौरान पाशिन्यान ने मोदी को आर्मेनिया आने का न्योता दिया। एससीओ बैठक से इतर प्रधानमंत्री मोदी ने किर्गिस्तान में भारत से जुड़े लोगों से मुलाकात की, जिनमें प्रवासी सदस्य, शिक्षाविद, शोधकर्ता, पूर्व छात्र और योग अभ्यासकर्ता शामिल थे।
