बदले संतुलन पर मुहर
यह विडंबना ही है कि जिस ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में ‘शक्ति के जरिए शांति’ का सिद्धांत अपनाया है, उसे पश्चिम एशिया में ईरान की शक्ति को स्वीकार करते हुए अमन के लिए तैयार होना पड़ा है! स्मरणीय है कि 27 फरवरी तक पश्चिमी देश ईरान के इस्लामी शासन को वैध नहीं मानते थे। उनकी ओर से ईरान बहिष्कृत देश था। उस पर अनेक प्रतिबंध लागू थे। इरान की अरबों डॉलर की संपत्ति उन्होंने जब्त कर रखी थी। होरमुज जलमार्ग के खुला या बंद होने का उस रोज तक कोई मुद्दा नहीं था। ईरान परमाणु विकल्प छोड़ने पर भी...