नई दिल्ली। भारत और ईरान संपर्क में हैं और समुद्र में सुरक्षा सहित सभी मसलों पर बातचीत हो रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों ने पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत की है। उन्होंने कहा कि भारत के विदेश मंत्री ईरानी विदेश मंत्री के साथ लगातार संपर्क में हैं। जायसवाल ने यह भी कहा कि युद्ध का एक देश तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर हर जगह दिखाई दे रहा है और इससे कई देशों के लोगों का जीवन प्रभावित हुआ है।
रणधीर जायसवाल ने भारतीय जहाजों को होरमुज की खाड़ी से गुजरने देने की इजाजत दिए जाने के सवाल को टाल दिया। इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल इस विषय पर ज्यादा कुछ कहना जल्दबाजी होगा। गौरतलब है कि गुरुवार की सुबह खबर आई कि ईरान ने भारत के जहाजों को होरमुज की खाड़ी से गुजरने की इजाजत दी है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। ईरानी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि ऐसी कोई छूट नहीं दी गई है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत ने ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को श्रद्धांजलि दी थी। उन्होंने बताया कि विदेश सचिव ने पांच मार्च को ईरानी दूतावास में जाकर शोक पुस्तिका पर दस्तखत किए थे। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि ईरान में मौजूद भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकार मदद कर रही है। अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते लौटने वालों को वीजा और सीमा पार कराने में सहायता दी जा रही है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल यानी जीसीसी के प्रस्ताव का भी समर्थन किया है। इस प्रस्ताव के साथ अब तक 135 देश जुड़ चुके हैं। यह प्रस्ताव खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और हमलों को लेकर लाया गया है। इसका मुख्य मकसद इलाके में हालात को और बिगड़ने से रोकना, जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखना और ऊर्जा सप्लाई को बाधित होने से बचाना है। प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान के ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और इनसे वैश्विक शांति को गंभीर खतरा है। सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 13 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया, जबकि रूस और चीन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।


