नई दिल्ली। तीन साल में जिस परीक्षा के दो बार पेपर लीक हुए, परीक्षा केंद्र मैनेज किए गए और परीक्षा में धांधली हुई उस परीक्षा सिस्टम को भारत सरकार ने फुलप्रूफ बताया है! बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि मेडिकल में दाखिले की नीट परीक्षा सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें सेंध लगाना मुश्किल है। सरकार ने कहा कि पेपर तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र में पहुंचाने तक पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा जाता है।
गौरतलब है कि इस साल तीन मई को हुई नीट यूजी परीक्षा के पेपर लीक हो गए थे, जिसकी वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी और 21 जून को दोबारा परीक्षा हुई। दो साल पहले 2024 में भी पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी। हालांकि तब सुप्रीम कोर्ट ने पूरी परीक्षा रद्द नहीं की थी लेकिन देश के कई परीक्षा केंद्रों पर दोबारा परीक्षा करानी पड़ी थी। इसके बावजूद सरकार ने इसके सिस्टम को फुलप्रूफ बताया है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की बात पर ध्यान नहीं दिया और परीक्षा कराने वाली केंद्र सरकार की संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए से यूपीएससी जैसा मजबूत परीक्षा सिस्टम बनाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नई तकनीक को समझने वाले अधिकारियों को शामिल करना चाहिए। साथ ही यह भी सलाह दी कि अनुभवी अधिकारियों का बार बार तबादला नहीं होना चाहिए।
सर्वोच्च अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि परीक्षा में सुधार के लिए बनी नंदन नीलेकणी कमेटी ने क्या काम किया है। इस पर सरकार ने बताया कि बुधवार, 19 अगस्त को ही पहली बैठक होनी है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, एफएआईएमए और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई की। इनमें एनटीए को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम की मांग की गई है।
बुधवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने बाद अपनी बात को दोहराते हुए दोबारा कहा कि एनटीए को यूपीएससी की तरह ऐसा मजबूत सिस्टम बनाना चाहिए, जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बाद भी संस्था के पास बना रहे। कोर्ट ने कहा कि कागज पर प्रक्रिया बेहतर दिख सकती है, लेकिन असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि एक परीक्षा के बाद अगली परीक्षा तक व्यवस्था में वही कमजोरियां दोबारा न लौटें।
