नई दिल्ली। सीपीआई एमएल के छात्र संगठन आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। उन्होंने तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद पीस बॉन्ड भरने के लिए पुलिस की ओर से मिले नोटिस को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी आपत्तियों को खारिज कर दिया है। इसका मतलब है कि उनको बॉन्ड भरना होगा। गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके से लेकर सौरव दास और आशुतोष रांका तक बॉन्ड भर कर ही हिरासत से छूटे हैं।
बहरहाल, नेहा बोरा ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती दी थी, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपए का निजी बॉन्ड भरने को कहा गया था। हाई कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद अब नेहा को पीस बॉन्ड भरना होगा। हालांकि कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को निर्देश दिए कि इस मामले से जुड़े सारे दस्तावेज नेहा बोरा को उपलब्ध कराए जाएं। कोर्ट ने एक दिन पहले 22 अक्टूबर को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
गौरतलब है कि नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को मंडी हाउस से कनॉट प्लेस की ओर मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। यह मार्च कॉकरोच जनता पार्टी के ‘लहरा दो तिरंगा’ कार्यक्रम से जुड़ा था। उन्हें अगले दिन रिहा कर दिया गया। इसके बाद 18 अक्टूबर को उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस मिला। नोटिस में 10 हजार रुपए का निजी बॉन्ड भरने और शांति बनाए रखने को कहा गया। इसे चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर बहस के दौरान उनके वकील ने कहा कि वे कनॉट प्लेस नहीं गई थीं और उनको 10 से 15 मिनट के अंदर ही हिरासत में ले लिया गया था। लेकिन हाई कोर्ट ने कोई दलील नहीं सुनी।
