नेपाल के रासुवा में भोटेकोशी नदी में आयी बाढ़ के बाद दो परिवारों ने एक शव को अपना परिजन बताया है और प्रशासन को दावों की पुष्टि करने के लिए डीएनए जांच का सहारा लेना पड़ रहा है।
बाढ़ के बाद प्रशासन के लिए शवों की शिनाख्त करना और उन्हें लापता लोगों की सूची से मिलाना मुश्किल हो गया है। ऐसी ही एक स्थिति पोखरा स्वास्थ्य विज्ञान अकादमी में सामने आयी, जब शव संख्या 1003 पर दो परिवारों ने अपना दावा पेश किया। एक परिवार का कहना था कि यह मैलुंग जलशक्ति परियोजना में काम करने वाले गोपाल दहित का शव है, जबकि दूसरे परिवार का दावा था कि शव रुपनदेही के पर्यटन गाइड दामोदर बसयाल का है।
दोनों परिवारों का कहना है कि शव का शारीरिक विवरण उनके रिश्तेदार से मिलता है, इसलिए पुलिस ने शव की शिनाख्त करने के लिए दहित, बसयाल और शव के डीएनए के नमूने रविवार को जांच के लिए भेजे। जब तक शव की पहचान नहीं हो जाती, तब तक उसे अस्पताल से नहीं ले जाया जा सकता।
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मामला उस समय पेचीदा हुआ, जब नेपाल के बरदिया से पोखरा पहुंचे दहित परिवार के सदस्यों ने अस्पताल में शव की पहचान गोपाल के रूप में की। गोपाल के बड़े भाई कृष्ण बहादुर थारू अभी अस्पताल नहीं पहुंचे थे, इसलिए परिजनों ने उनके आने का इंतज़ार किया। इसी बीच, रविवार दोपहर को राधे श्याम शर्मा बसयाल ने पोखरा अस्पताल पहुंचकर बताया कि उन्हें शव संख्या 1003 की तस्वीर दिखायी गयी है और वह पुष्टि करते हैं कि यह उनके छोटे भाई दामोदर का शव है, जो बाढ़ के समय 67 पर्यटकों के साथ मानसरोवर से केरुंग के सफर पर था और उसके बाद से लापता है।
काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट में श्री बसयाल के हवाले से कहा गया कि शव के चेहरे पर कई चीज़ें उनके भाई से मेल खाती हैं। शव के चेहरे पर एक तिल है, जो मेल खाता है। उनके भाई के होंठ भी शव की तरह मोटे थे। उन्होंने कहा कि पहचान हो जाने तक दोनों में से किसी भी परिवार को शव नहीं सौंपा जा सकता। श्री बसयाल ने कहा कि इस तरह से समय ज्यादा लगेगा, लेकिन यह पुष्टि हो जायेगी कि शव किसका है।
दूसरी ओर, गोपाल की बहन मंजी थारू को यकीन है कि यह शव उनके भाई का ही है। उन्होंने कहा कि शव के दांत, माथा, होंठ, हाथ, सीना और चेहरा सभी मेल खाते थे।
यह अपने जैसा अनूठा मामला नहीं है। कास्की जिला पुलिस के अनुसार, एक अन्य शव पर दो परिवारों ने दावा पेश किया है। पुलिस ने अब तक पांच परिवारों के डीएनए के नमूने लिये हैं, ताकि शव की सही तरह पहचान की जा सके।
पुलिस ने कहा कि आपदा के समय कोई भी शव गलत परिवार के पास जाने से रोकने के लिए डीएनए जांच जरूरी होती है। अब तक पोखरा से 16 शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द किया जा चुका है।
Pic Credit : ANI
