काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पिछले महीने अचानक बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्यों में मदद के लिए भारत का धन्यवाद दिया है। उन्होंने नेपाल की संसद में बुधवार को भारत के साथ साथ चीन को भी धन्यवाद दिया। बुधवार को संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों ने समय पर राहत सामग्री, तकनीकी टीमें और आपात मदद भेजी।
गौरतलब है कि भारत ने राहत सामग्री की पांचवीं खेप भेजी है। भारतीय टीमें सुरंगों में सर्च ऑपरेशन और शवों की पहचान में मदद कर रही हैं। वहीं, चीन ने ग्यिरोंग बॉर्डर तक जाने वाला हाईवे खोल दिया है, जिससे राहत दल प्रभावित इलाकों तक पहुंच रहे हैं। इस बीच खबर है कि बाढ़ से अब तक कुल 1,225 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें नेपाल में 1,204 और तिब्बत में 21 लोगों की जान गई है। बताया जा रहा है कि अब भी 47 सौ से ज्यादा लोग लापता हैं। कई पनबिजली परियोजनाओं के कर्मचारी गायब हैं। आशंका है कि कुछ लोग अब भी सुरंगों में फंसे हो सकते हैं।
बहरहाल, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुधवार को संसद में अपने भाषण में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ को हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु खतरों की गंभीर चेतावनी बताया। संसद को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि विशेषज्ञों के मुताबिक ऊंचे हिमालयी इलाके में बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटने से यह आपदा आई। इससे साफ है कि जलवायु परिवर्तन के साथ हिमालयी क्षेत्र में आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
बालेन शाह ने अपने भाषण में कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया की गतिविधियों का नतीजा है। इसलिए इसके असर को कम करना और इससे पैदा होने वाले खतरों से निपटना भी पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है। इस बीच खबर है कि नेपाल में बाढ़ के बाद अब बारिश भी हो रही है, जिससे चितवन में नारायणी और त्रिशूली नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इससे कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
