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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मामले में नई याचिकाएं

New Delhi, Oct 06 (ANI): Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar along with Election Commissioners Sukhbir Singh Sandhu and Vivek Joshi, during a press conference regarding the Bihar Assembly Elections, at Vigyan Bhavan in New Delhi on Monday. (ANI Photo/Jitender Gupta)

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमों में नया पेंच आ गया है। इस मामले में दो नई याचिकाएं दायर की गई हैं। असल में 2023 में बने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले पर 23 सितंबर को दो जजों जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने विचार किया था। दोनों जजों ने अलग अलग फैसला सुनाया। जस्टिस दत्ता ने कहा कि इस मामले को बड़ी बेंच को भेजने की जरुरत नहीं है, जबकि जस्टिस शर्मा ने कहा कि इसे पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए।

हालांकि दोनों इस बात पर सहमत हुए कि मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज देना चाहिए। बुधवार, सात अक्टूबर को वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने बताया कि इस मामले में एक याचिका दायर की गई, जिसमें जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा के फैसले को वापस लेने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस ने कहा कि इस याचिका की जांच की जाएगी। वकील ने यह भी बताया कि एक अन्य सुधारात्मक याचिका भी दायर की गई है। चीफ जस्टिस ने कहा कि उनको उस याचिका की भी जानकारी है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक पैनल का गठन किया था, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस को रखा गया था। हालांकि अदालत ने कहा था कि यह अस्थायी व्यवस्था है। इसके बाद सरकार ने संसद में एक कानून बनाया, जिसमें नियुक्ति समिति से चीफ जस्टिस को हटा कर वहां एक केंद्रीय मंत्री को रख दिया गया। इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। उसे बड़ी बेंच के सामने भेजने का मामला उलझा हुआ है।

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने इसे संविधान पीठ को भेजने की बात रही है। लेकिन जस्टिस शर्मा को लेकर पक्षपात की आशंका जताई गई है। उनके बेटे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुना आयोग के स्टैंडिंग काउंसिल हैं। बहरहाल, अगर सुप्रीम कोर्ट नई याचिकाओं की जांच करता है और उसे सुनवाई के लिए स्वीकार करता है तो इस कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाओं की सुनवाई प्रभावित होगी और इसे बड़े बेंच को भेजने का मामला भी अटकेगा।

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