लखनऊ। ताजमहल पर हिंदू समुदाय की दावेदारी को लेकर एक बार फिर कानून दांवपेंच शुरू हो गया है। इसे भगवान शिव का मंदिर बताते हुए एक याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल की गई है। इस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानी एएसआई सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
ताजमहल परिसर के भीतर ‘भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय’ मंदिर होने का दावा करते हुए यह याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का समय दिया है। इससे पहले आगरा की निचली अदालत ने विवादित परिसर का वैज्ञानिक या एडवोकेट कमिश्नर के जरिए सर्वे कराने की मांग को खारिज कर दिया था।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सीधे इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया। इस याचिका में मांग की गई है कि आगरा की जिला अदालत और अतिरिक्त जिला जज की ओर से पारित किए गए पुराने आदेशों को पूरी तरह से रद्द किया जाए। इसके अलावा ताजमहल परिसर की वास्तविकता और धार्मिक प्रतीकों की जांच के लिए एडवोकेट कमिश्नर के जरिए निष्पक्ष सर्वेक्षण कराया जाए।
