Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

मंदिर का चढ़ावा भगवान की संपत्ति है

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़े अहम मसले पर बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि मंदिरों का चढ़ावा भगवान की संपत्ति है, जिसका इस्तेमाल किसी को ऑपरेटिव बैंक की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए नहीं किया जा सकता है। असल में केरल हाई कोर्ट ने पहले यह फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ केरल के को ऑपरेटिव बैंक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने सारी याचिकाओं को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

केरल हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि को ऑपरेटिव बैंक तिरुनेल्ली मंदिर देवस्वम् को एफडी की रकम दो महीने के भीतर लौटाएं। बैंक इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने बैंकों के वकीलों से पूछा, क्या आप मंदिर का पैसा बैंक बचाने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं? इसके बाद कोर्ट ने यह भी कहा कि मंदिर का धन सुरक्षित और भरोसेमंद राष्ट्रीयकृत बैंक में रखा जाना चाहिए, जहां मंदिर को ज्यादा ब्याज भी मिले।

अपने फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि यह जरूर कहा कि बैंक चाहें तो पैसा लौटाने की समय सीमा बढ़ाने के लिए हाई कोर्ट से अनुरोध कर सकते हैं। गौरतलब है कि केरल के तिरुनेल्ली मंदिर देवस्वम ने 2025 में स्थानीय कोऑपरेटिव बैंकों से एफडी की रकम वापस मांगी थी। बैंकों ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। मंदिर का आरोप था कि बैंक न तो एफडी बंद कर रहे थे और न ही रकम वापस कर रहे। आखिरकार मंदिर ने मामला केरल हाई कोर्ट में उठाया। हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद माना कि बैंक बिना किसी वैध कारण के मंदिर ट्रस्ट की जमा राशि रोक रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि बैंक दो महीने के भीतर तिरुनेल्ली देवस्वम का पूरा पैसा वापस लौटाएं।

Exit mobile version