Naya India-Hindi News, Latest Hindi News, Breaking News, Hindi Samachar

तेल के दाम में लगी आग

नई दिल्ली। इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस ठिकाने साउथ पार्स पर हमला किया तो जवाब में ईरान ने कतर के सबसे सबसे बड़ी रिफाइनरी रास लफान पर हमला कर दिया। इसके बाद ईरान ने एक एक करके कई खाड़ी देशों के तेल ठिकानों पर हमला किया। इस हमले के बाद अचानक तेल के बाजार में आग लग गई। कच्चे तेल की कीमत जो पहले से बढ़ रही थी वह रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत औसतन 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची लेकिन भारत के लिए तेल ज्यादा महंगा हो गया।

कच्चे तेल के ‘इंडियन बास्केट’ की कीमत बढ़ कर 130 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई। भारत जो कच्चा तेल खरीदता है उसका ज्यादातर हिस्सा खाड़ी देशों के तेल का होता है। इसमें ब्रेंट भी है और दुबई व ओमान का कच्चा तेल भी है। इसका औसत 130 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गया है। वैसे रूस का तेल भी भारत आते आते एक सौ डॉलर प्रति बैरल का हो जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर भारत पर बहुत जल्दी दिखने लगेगा। अगर थोड़े दिन और युद्ध चलता है तो भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत में बढ़ी बढ़ोतरी हो सकती है। कच्चे तेल के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक गैस की कीमत में भी 25 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

इजराइल और ईरान दोनों की ओर से तेल ठिकानों पर हमले के साथ साथ होरमुज की खाड़ी लगभग पूरी तरह से बंद हो गई है। इस वजह से भारत के कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और प्राकृतिक गैस के दाम भी बढ़े हैं। हालांकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत में एलपीजी की बुकिंग अब युद्ध शुरू हो से पहले वाले औसत पर लौट आई है। उन्होंने कहा कि 57 लाख सिलेंडर की बुकिंग औसतन हो रही है। उन्होंने बताया कि भारत अब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भी प्राकृतिक गैस खरीद रहा है।

इस बीच भारत ने पश्चिम एशिया में ऊर्जा ठिकानों पर हमले की निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है और इन्हें तुरंत रोकने की मांग करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पहले ही कह चुका है कि सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर खास कर ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। खबर है कि ईरान ने कतर का रास लफान के साथ साथ सऊदी अरब के यानबू में सामरेफ रिफाइनरी पर भी हमला किया था। इसके अलावा कुवैत के ऊर्जा ठिकानों पर भी ईरान ने हमले किए है।

जानकारों का मानना है कि अगर कच्चा तेल इसी स्तर पर बना रहा, तो सरकारी तेल कंपनियों के लिए मौजूदा कीमतों पर पेट्रोल, डीजल और गैस बेचना मुश्किल होगा। सरकारी तेल कंपनियां फिलहाल अपना मार्जिन कम करके या घाटा उठा कर कीमतों को कंट्रोल में रख रही हैं। यह भी ध्यान रखने की जरुरत है कि कच्चे तेल से सिर्फ पेट्रोल, डीजल नहीं बनता बल्कि पेंट, प्लास्टिक, फर्टिलाइजर और दवाइयों के कच्चे माल में भी इसका इस्तेमाल होता है। पेट्रोल, डीजल और गैस महंगा होने से उत्पादन की लागत बढ़ेगी और साथ ही माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे फल, सब्जी और अनाज के दाम बढ़ेंगे।

Exit mobile version