शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे और नीट यूजी पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा की मांग पर अड़े विपक्ष ने लगातार चौथे दिन गुरुवार को भी राज्यसभा में जोरदार हंगामा किया जिसके कारण तीन बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी।
संसद के मानसून सत्र के चार दिन बीत गये हैं और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर गतिरोध के बरकरार रहने से पहले चार दिन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ गयी। तीन बजे जब सदन दोबारा समवेत हुआ तो उप सभापति हरिवंश ने कहा कि नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन कुछ बोलना चाहते हैं। इस पर श्री खरगे ने कुछ लिखित पंक्तियां पढते हुए कहा देश को जिंदा रखने के लिए भले ही मर जायेंगे, ये दिल और ये जान सब कुर्बान कर जायेंगे मगर देश से अन्याय मिटाने के लिए हर चुनौती से टकरा जायेंगे, कुछ ही देर की खामोशी है …. उनकी बात पूरी भी नहीं हो पायी थी कि उप सभापति ने कहा कि संसदीय मंत्री कुछ कहना चाहते हैं। संसदीय मंत्री किरेण रिजिजू ने कहा कि नेता विपक्ष सदन चलाने और चर्चा की बात नहीं कर रहे वह कुछ लिखकर लाये हैं और चर्चा का विरोध कर रहे हैं।
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उनके इतना कहते ही विपक्ष के सदस्यों ने जोर-जोर से बोलना शुरू कर दिया। इधर सत्ता पक्ष के लोगों ने भी इसका जवाब दिया और सदन में अव्यवस्था की स्थिति बनते देख उपसभापति ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले इसी मुद्दे पर कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर दो बजे तक स्थगित की गयी।
श्री प्रधान के इस्तीफे तथा नीट के मुद्दे पर सरकार तथा विपक्ष के अपने-अपने रुख पर अड़े रहने के कारण सदन में पिछले चार दिन से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़िग है और उसका स्पष्ट कहना है कि इस्तीफे के बिना चर्चा शुरू नहीं होगी वहीं सत्ता पक्ष श्री प्रधान के इस्तीफे पर चुप्पी साधे हुए है और उसका कहना है कि वह नीट से संबंधित हर मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए तैयार है तथा विपक्ष को भी चर्चा के लिए तैयार होना चाहिए। इस गतिरोध के चलते मानसून सत्र के पहले चार दिन सदन में कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका तथा कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ गयी।
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