नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता शिफ्ट किए जाने के एक दिन बाद बुधवार को विपक्षी सांसदों का एक दल उनसे मिलने पहुंचा। हालांकि उनको अस्पताल के बाहर ही रोक दिया गया। कहा गया कि सोनम वांगचुक से सिर्फ परिवार के सदस्य ही मिल सकते हैं। हालांकि सांसद देर शाम तक वहां बैठे रहे। उन्होंने कहा कि अगर उनको मिलने नहीं दिया जाता है तो वे सुबह तक बैठे रहेंगे।
सोनम वांगचुक से मिलने गए सांसदों में आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, राजद आदि के नेता थे। अस्पताल के गेट पर रोके जाने के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह सहित सभी नेता मेदांता के गेट पर धरने पर बैठ गए। संजय सिंह ने कहा, ‘इतिहास में पहली बार सुन रहे हैं कि अस्पताल में भर्ती किसी मरीज से लोगों को मिलने से रोका जा रहा है। हम सोनम वांगचुक से मिलने आए हैं’। सपा की इकरा हसन और जेएमएम की महुआ माझी भी मेदांता पहुंचे थे।
दरअसल विपक्ष के 55 सांसदों ने सोनम वांगचुक को पत्र लिखकर अनशन खत्म करने की अपील की है। इनमें आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित अन्य पार्टियों नेता शामिल हैं। गौरतलब है कि वांगचुक पिछले 24 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्हें पहले जंतर मंतर से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। मंगलवार को कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल शिफ्ट किया गया है। सूत्रों के मुताबिक बुधवार की सुबह केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने वांगचुक से मुलाकात की थी। हालांकि इसका ब्योरा सामने नहीं आया है।
इस बीच बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोपों वाली याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड, जैसे सीसीटीवी और अन्य फुटेज, सुरक्षित रखने को कहा है। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसीटर जनरल एस राजू ने कहा कि याचिकाओं का मकसद पब्लिसिटी पाना था। इस पर हाई कोर्ट ने पूछा, ‘आप यह कैसे कह सकते हैं कि यह पब्लिसिटी के लिए दायर याचिका है’?
