वांगचुक तो विपक्ष के ही संपर्क में थे
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 26 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठे। इस दौरान उनका वजन 12 किलो कम हो गया। उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन को वैधता दिलाई और देश भर में उनके कारण समर्थन मिला। लेकिन जैसे ही उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त की वैसे ही कांग्रेस और विपक्षी इकोसिस्टम के लोग उनको भाजपा का आदमी साबित करने में लग गए। कई लोगों ने सवाल उठाया कि वांगचुक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जोधपुर की जेल में बंद थे। उनके ऊपर से मुकदमा योजना के तहत हटाया गया और जेल से छोड़ा गया। उसके बाद उनको योजना के तहत...