नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के पहले चरण का आखिरी हफ्ता चल रहा है और इसकी शुरुआत भी हंगामे के साथ हुई। बजट सत्र के तीसरे हफ्ते के पहले दिन सोमवार को प्रश्नकाल नहीं चल सका और पूरे दिन में कुल 13 मिनट की कार्यवाही हुई। कई बार के स्थगन के बाद सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। सोमवार सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को नहीं बोलने देने का मुद्दा उठाया। विपक्षी सांसदों के हंगामे और नारेबाजी की वजह से स्पीकर ओम बिरला को पांच मिनट के भीतर ही कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
बाद में इस मसले को सुलझाने के लिए बैठक भी हुई लेकिन उसका भी कोई नतीजा नहीं निकला। राहुल गांधी ने दावा किया कि स्पीकर ने उनसे कहा है कि उनको बोलने दिया जाएगा। हालांकि संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू ने इसका खंडन किया। लोकसभा की कार्यवाही जब तीन बजे शुरू हुई तो आसन पर भाजपा सांसद संध्या रॉय थीं। राहुल ने कहा, एक घंटा पहले स्पीकर के पास हम गए, स्पीकर ने हमें कमिट किया कि मुझे बजट डिस्कशन से पहले बोलने दिए जाएगा, आप मुझे बोलने नहीं दे रही हैं। मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि आप मुझे बोलने देंगी या नहीं?
राहुल की बात के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा, ‘मैं भी स्पीकर के केबिन में मौजूद था। ऐसा कोई कमिटनमेंट नहीं किया गया’। इसके बाद संध्या रॉय ने राहुल से कहा कि उनकी तरफ से किसी और मुद्दे के लिए कोई नोटिस नहीं आया है, बजट पर चर्चा करनी हो तो बताएं। राहुल चाहते थे कि बजट पर चर्चा से पहले उनको बोलने दिया जाए। माना जा रहा है कि वे दो फरवरी के अपने भाषण को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उस समय उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब के अंश पढ़ने की कोशिश की थी। बहरहाल, जब उनको बोलने की अनुमति नहीं मिली तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी गई।
संसद में गतिरोध पर राहुल गांधी ने संसद परिसर में कहा कि नरवणे की किताब के मुद्दे पर सरकार ने उन्हें बार-बार बोलने नहीं दिया और सदन रोक दिया। राहुल ने कहा, ‘रक्षा मंत्री ने गलत कहा कि किताब छपी नहीं है, जबकि वह छप चुकी है। राष्ट्रपति के भाषण पर भी एलओपी और विपक्ष को बोलने नहीं दिया गया। वहीं सत्तापक्ष के एक सदस्य ने कई किताबें कोट कर आपत्तिजनक बातें कहीं, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा विपक्ष के सदस्यों को सस्पेंड किया गया’। उन्होंने कहा, ‘यह झूठ फैलाया गया कि विपक्ष प्रधानमंत्री को धमकी दे रहा था। सच यह है कि प्रधानमंत्री सच से डरकर सदन नहीं आए। अगर किसी ने धमकी दी है तो एफआईआर कर गिरफ्तार करें’। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार बहस से डर रही है। खासकर बजट, यूएस डील और किसानों पर उसके असर पर बात करने से। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि ‘स्पीकर पर इतना प्रेशर है कि उन्हें खुद बयान देना पड़ रहा है, जो सही नहीं है’।
