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पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों के भीतर बाजार पहुंच बढ़ाने पर दिया जोर

OSAKA, AUG 27 (UNI):- Union Commerce and Industry Minister Piyush Goyal met with a delegation led by Katsumi Azuma, President and CEO of ROHM Co. Ltd., in Osaka. Japan, on Thursday. UNI PHOTO P4U

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों के भीतर बाजार पहुंच बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और एक-दूसरे की पेशेवरों डिग्रियों को मान्यता देने की अपील की। श्री गोयल ने यहां भारत मंडपम् में ब्रिक्स बिजनेस फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि कुल वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी लगभग एक-चौथाई है। उन्होंने आर्थिक सहयोग के लिए पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए अधिक बाजार पहुंच, आपूर्ति श्रृंखला विविधता और आसान नियामक प्रक्रिया की जरूरत पर जोर दिया।

सत्र को रूस से आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी संबोधित किया। श्री गोयल ने कहा कि ब्रिक्स देशों को आपसी व्यापार में भारत एक अनिवार्य स्तंभ है। उन्होंने देश के इंजीनियरिंग उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत इन और दूसरे उत्पादों के लिए ब्रिक्स को एक जरूरी बाजार के तौर पर देखता है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से एक-दूसरे के उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने की अपील की, जिसमें कच्चा माल और महत्वपूर्ण खनिज भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला तभी मजबूत होंगी जब वे दोतरफा होंगी। आसान बाजार पहुंच की वकालत करते हुए श्री गोयल ने ब्रिक्स के सदस्य देशों और साझेदार देशों से अपने बाजार खोलने और नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाने की अपील की। वाणिज्य मंत्री ने ब्रिक्स देशों से कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, एग्री-टेक स्टार्टअप को बढ़ावा देने, सेवा क्षेत्र को एक-दूसरे के लिए खोलने, सीमा पार पेशेवरों की आवाजाही आसान बनाने और एक-दूसरे की पेशेवर डिग्रियों को मान्यता देने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बिजनेस फोरम से ब्रिक्स के अंदर व्यापार और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए रचनात्मक सुझाव समाने आएंगे।

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डॉ. जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष ब्रिक्स के संस्थागत सहयोग के 20 साल पूरे हो रहे हैं। इस दौरान ब्रिक्स की सदस्यता, एजेंडा और सहयोग के तरीकों में काफी बदलाव और विकास हुआ है। इस शिखर सम्मेलन के थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये प्राथमिकताएं इसलिए भी अहम हैं क्योंकि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं। अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता इसकी मुख्य विशेषताएँ बन गई हैं, जबकि भू-राजनीतिक संघर्ष, महामारी, जलवायु से जुड़ी परेशानियां, डिजिटलाइजेशन और तकनीकी प्रगति आर्थिक परिदृश्य को बदल रहे हैं।

श्री प्रसाद ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ब्रिक्स बिजनेस फोरम सदस्य देशों की ताकत को ठोस व्यावसायिक नतीजों में बदलने का मौका देता है। उन्होंने सहयोग के एक अहम क्षेत्र के तौर पर डिजिटल सेवाओं, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर जोर दिया। उन्होंने एआई के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के अधिक आदान-प्रदान और सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का उल्लेख करते हुए उन्होंने पूरे सेमीकंडक्टर पारितंत्र को विकसित करने के लिए सहयोग का आह्वान किया। वाणिज्य सचिव ने कहा कि ब्रिक्स एक अहम और तेजी से बढ़ता हुआ बाजार है। सदस्य देशों के बीच व्यापार 2003 में 84 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में लगभग 1.2 लाख करोड़ डॉलर हो गया है। उन्होंने बहुस्तरीय व्यापार तंत्र को बनाए रखने और उसे मजबूत करने पर जोर देने के साथ किफायती कार्यशील पूंजी के माध्यम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने की बात कही।

Pic Credit : ANI

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