नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग लेकर रविवार को लगातार दूसरे दिन दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी और लेफ्ट पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। शनिवार को मुकाबले रविवार को प्रदर्शन की तीव्रता कम थी लेकिन फिर सेंट्रल दिल्ली सहित अन्य कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए और करीब दो सौ लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स ने प्रदर्शनकारियों को भगाने के बाद कनॉट प्लेस में फ्लैग मार्च किया। कई जगह युवाओं के अभिभावक भी सड़कों पर उतरे और उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चों को पुलिस हिरासत में ले रही है।
रविवार को लगातार दूसरे दिन एक तरफ प्रदर्शन हो रहे थे तो दूसरी ओर पूरी दिल्ली में भारी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात रहे। इससे पहले सुबह 10 बजे के करीब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा किया गया। वे करीब 23 घंटे हिरासत में रहे। उन्होंने एक बॉन्ड भी भरा, जिसके बाद उनको रिहा किया गया।
बहरहाल, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर नहीं जाने दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कनॉट प्लेस के इलाके में जमा होने लगे। वहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया तो सीपीएम के छात्र संगठन एसएफआई की आईसी घोष पुलिस की बस के सामने आ गईं। सीपीएम के छात्रों ने बस के सामने बैठ कर प्रोटेस्ट किया। गौरतलब है कि एसएफआई ने दिल्ली पुलिस के ऊपर महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी का आरोप लगाया था।
इस बात को लेकर एसएफआई ने विरोध करते हुए राजीव चौक मेट्रो स्टेशन गेट नंबर सात के सामने कई महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हाथों में तिरंगा झंडा लेकर प्रदर्शन किया। ये सभी लोग बस के आगे जमीन पर बैठ गए। करीब 10 मिनट की जद्दोजहद के बाद दिल्ली पुलिस और अतिरिक्त सुरक्षा बलों ने सभी हटा कर बस में बैठाया और वहां से हटाया। कुछ प्रदर्शनकारी हाथ में डंडे लेकर कनॉट प्लेस में घूम रहे थे। उनके साथ पुलिस की झड़प भी हुई। पुलिस ने लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से भीड़ नहीं लगाने की अपील की। प्रदर्शन को देखते हुए कनॉट प्लेस के कई इलाकों में दुकानें बंद रहीं। लोगों ने प्रदर्शन का नया तरीका निकाल लिया। कई नावों पर सवार लोगों ने यमुना नदी में प्रदर्शन किया।
