नई दिल्ली। गुरुवार से शुरू हो रहे तीन दिन के संसद सत्र से एक दिन पहले बुधवार को विपक्षी पार्टियों की बैठक हुई, जिसमें सभी नेताओं ने केंद्र सरकार के ऊपर निशाना साधा। राहुल गांधी ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण का पूरी तरह से समर्थन करती है। संसद ने 2023 में इस बिल को सर्वसम्मति से पास किया था, और अब यह हमारे संविधान का हिस्सा बन चुका है। सरकार अब जो प्रस्ताव ला रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना देना नहीं है। यह संशोधन, परिसीमन और चुनावी क्षेत्रों के मनमाने फेरबदल के जरिए सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश है’।
राहुल ने जाति जनगणना का मुद्दा भी उठाया और कहा, ‘हम जाति जनगणना के आंकड़ों को नजरअंदाज करके ओबीसी, दलित और आदिवासियों के हिस्से की चोरी नहीं होने देंगे। साथ ही, हम दक्षिणी, उत्तर पूर्वी, उत्तर पश्चिमी और छोटे राज्यों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देंगे’। तमिलनाडु में सत्तारूढ़ डीएमके ने भी परिसीमन का विरोध किया। उसके नेता टीआर बालू ने कहा, 2023 में पारित विधेयक को उसकी मूल भावना के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद ईटी मोहम्मद बशीर ने कहा, ‘हम परिसीमन बिल का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि यह असल में एक जाल है। वे 2023 में भी आरक्षण दे सकते थे, और हम अब भी उसका समर्थन करते हैं। लेकिन हमने परिसीमन का पूरी ताकत से विरोध करने का फैसला किया है, क्योंकि यह न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है’।
