नई दिल्ली। गुरुवार को लगातार तीसरे दिन नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रदर्शन के लिए दिल्ली की सड़कों पर उतरे। वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और दूसरे विपक्षी नेताओं के साथ राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इससे पहले एक घंटे तक राहुल और दूसरे विपक्षी नेता राजघाट के बाहर खड़े रहे। पुलिस ने वहां सुरक्षा के भारी बंदोबस्त किए गए थे। राहुल बिना पूर्व सूचना के राजघाट पहुंचे थे। प्रदर्शन की इसी कड़ी में विपक्ष ने शुक्रवार, नौ अक्टूबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का समय मांगा है।
इससे पहले राहुल गांधी ने दो दिन सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शन किया था। वे छह अक्टूबर को निर्वाचन सदन घेरने गए थे। हालांकि पुलिस ने उनको रोक लिया और तब वे करीब आठ घंटे तक आकाशवाणी परिसर में घुस कर बैठे रहे थे। अगले दिन यानी सात अक्टूबर को वे विपक्षी नेताओं को लेकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए गए। हालांकि पुलिस ने उनको जंतर मंतर से दो सौ मीटर दूर रोक दिया। राहुल और प्रियंका वहीं धरने पर बैठ गए थे, जहां से पुलिस उनको हिरासत में लेकर थाने गई थी।
गुरुवार को तीसरे दिन राहुल ने विपक्ष के नेताओं को कनॉट प्लेस में एक रेस्तरां में लंच के लिए बुलाया और वहां से बसों में भर कर विपक्ष के नेता राजघाट गए। लगातार तीसरे दिन प्रियंका गांधी वाड्रा भी राहुल के साथ आंदोलन में शामिल रहीं। गौरतलब है कि 30 सितंबर को हुई विपक्ष की बैठक में दो से आठ अक्टूबर तक प्रदर्शन करने का फैसला किया गया था।
विपक्ष के प्रदर्शन को देखते हुए सेंट्रल दिल्ली के इलाके में भारी सुरक्षा व्यववस्था की गई थी। राहुल ने पहले से सूचना नहीं दी थी इसलिए उनको राजघाट पर करीब एक घंटे इंतजार करना पड़ा। एक घंटे के बाद वे सभी सांसदों और नेताओं के साथ अंदर गए बापू को श्रद्धांजलि दी। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कहा था कि वे गांधीजी से प्रार्थना करेंगे कि सरकार को सद्बुद्धि दे। वह लोगों का वोट देने का अधिकार न छीने। उन्होंने कहा कि सरकार के फैसले जनता को संकट में डालने वाले हैं। राहुल गांधी ने कहा, ‘हमारे साथ तीन सौ से ज्यादा सांसद हैं। हम लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते हैं। जिन्होंने संविधान को नष्ट किया है, उन पर कार्रवाई होगी’।
