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एससी, एसटी एक्ट पर सुनवाई से इनकार

New Delhi, May 22 (ANI): A view of the Supreme Court of India, in New Delhi on Thursday. (ANI Photo/Rahul Singh)

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति यानी एससी, एसटी के उत्पीड़न को रोकने के लिए बने कानून की समीक्षा की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। एक जनहित याचिका के जरिए इस कानून की कई धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिका में इस कानून को संविधान का उल्लंघन बताते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इस कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें सजा की दर बहुत कम है, जबकि गलत केस पर करोडों मुआवजा भी दिया गया है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि साल 2020 में इस कानून की कुछ धाराओं को निरस्त किए जाने के बाद संसद से इसे दोबारा लागू कर दिया था। उसके बाद 2020 में तीन जजों की बेंच इस कानून को बरकरार रख चुकी है और ऐसी याचिकाएं पहले खारिज भी हो चुकी हैं।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा, ‘किसी एक व्यक्ति के साथ हुई घटना या कथित गलत इस्तेमाल के आधार पर उस कानून की दोबारा समीक्षा नहीं की जा सकती, जिसे पहले ही तीन जजों की बेंच सही ठहरा चुकी है’। उन्होंने आगे कहा, ‘जब तीन जज उस कानून को मंजूरी दे चुके हैं, तो सिर्फ पांच साल के भीतर उसे फिर से क्यों परखा जाए’?

बेंच की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हालांकि कहा कि अगर कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग होता है, तो अदालत अपने न्यायिक अधिकारों का इस्तेमाल करके ऐसे मामलों से निपट सकती है। उन्होंने कहा कि कानून का दुरुपयोग हो रहा है इसका यह मतलब यह नहीं है कि पूरा कानून ही गलत या खराब है।

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