नई दिल्ली। मसौम विभाग ने इस साल दक्षिण पश्चिमी मानसून में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है और इस बीच खबर है कि सुपर अल नीनो सक्रिय हो सकता है, जिससे बारिश की संभावना कमजोर पड़ती है। यह भी कहा जा रहा है कि सुपर अल नीनो मई से जुलाई के बीच ही सक्रिय होगा। ध्यान रहे मई के आखिरी हफ्ते में मानसून केरल के समुद्र तट पर पहुंचेगा और जुलाई तक पूरे देश में पहुंचेगा। उसी समय सुपर अल नीनो के सक्रिय होने से इस पर असर पड़ने की संभावना है।
अमेरिकी मौसम एजेंसी ‘नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ यानी नोआ ने बताया है कि सुपर अल नीनो मई से जुलाई के दौरान ही सक्रिय हो सकता है। नोआ ने बताया कि प्रशांत महासागर का तापमान इस बार मई में सामान्य से 0.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। यह गर्मी की स्थिति इस बार पूरे मानसून सीजन के दौरान बनी रह सकती है। पिछले महीने जारी अनुमान में सुपर अल नीनो की संभावना 61 थी, जो अब बढ़ कर 82 फीसदी हो गई है।
इस बीच मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि सुपर अल नीनो सीधा असर मानसून की बारिश पर पड़ेगा। इससे देश में सूखे का खतरा और ज्यादा बढ़ जाएगा। नोआ के नए अपडेट के मुताबिक इस साल मई से जुलाई के दौरान सुपर अल नीनो सक्रिय होने की 82 फीसदी संभावना है। यह भी कहा गया है कि अल नीनो सर्दियों में यानी दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक जारी रह सकता है। इसकी संभावना 96 फीसदी है।
इस सुपर अल नीनो से कमजोर मानसून, सूखे और हीटवेव की आशंका अब ज्यादा हो गई है। इससे पहले जब जब अल नीनो सक्रिय हुआ है तब तक सूखे के हालात बने हैं। आशंका जताई जा रही है कि इससे भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में बारिश कम होगी और भीषण गर्मी पड़ेगी। उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत के हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बनने का सबसे ज्यादा खतरा है, जिससे लंबे सूखे और कृषि नुकसान की आशंका बढ़ सकती है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान इस लिहाज से सबसे संवेदनशील राज्यों में माने जा रहे हैं। मध्य और पश्चिम भारत में जहां अच्छी बारिश होती है वहां भी सामान्य से कम बारिश की संभावना है।
