वाराणसी। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 19 जनवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा था। अब 11 दिन के बाद शंकराचार्य ने योगी आदित्यनाथ से हिंदू होने का प्रमाण मांगा है। शंकराचार्य ने उनको 40 दिन का समय दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 40 दिन में गोभक्त होने का प्रमाण दें और अगर नहीं देते हैं तो उनको नकली हिंदू माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश से गोमांस का निर्यात बंद करें और गाय को माता का दर्जा दें। इसके लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 10 और 11 मार्च को वाराणसी में संतों की सभा बुलाई है। उन्होंने कहा है इतिहास में पहली बार किसी शासक ने शंकराचार्य से प्रमाणपत्र मांगा है।
शुक्रवार को वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके शंकराचार्य ने राज्य सरकार पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा, ‘मुझसे शंकराचार्य होने का प्रमाण पत्र मांगा गया। वह मैंने दे दिया। मेरे प्रमाण सच्चे थे, इसलिए उन्हें मानना पड़ा। अब प्रमाण मांगने का समय पीछे छूट गया। अब मुख्यमंत्री को अपने हिंदू होने का प्रमाण देना चाहिए’। शंकराचार्य ने कहा, ‘हम आपको 40 दिन का समय दे रहे। इन दिनों में आप गोभक्त होने का प्रमाण दीजिए। अगर प्रमाण नहीं दे पाते, तो समझा जाएगा कि आप नकली हिंदू, कालनेमि, पाखंडी और ढोंगी हैं। सिर्फ दिखावे के लिए आपने गेरुआ वस्त्र धारण किया है’। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में यूपी का गोमांस बिक रहा है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री और उनका समर्थन करने वाले जगद्गुरु रामभद्राचार्य दोनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दोनों घेराबंदी करके गोहत्या बंदी की मांग करने वालों पर तरह तरह के हमले कर रहे। उन्होंने कहा कि अगर योगी आदित्यनाथ सच में हिंदू हैं, तो गोमाता को राज्य माता घोषित करें और यूपी से गोमांस का निर्यात बंद करें, नहीं तो गैर हिंदू घोषित कर देंगे।
शंकराचार्य ने शुक्रवार को कहा, ’10 और 11 मार्च को लखनऊ में सभी संत, महंत और आचार्य एकत्र हों। वहां यह तय किया जाएगा कि कौन हिंदू है, कौन हिंदू हृदय सम्राट है और किसे छद्म हिंदू या नकली हिंदू घोषित किया जाना चाहिए’। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘अब नकली हिंदुओं का पर्दाफाश किया जाना है। जितने भी हिंदू हैं, उनके साथ बहुत बड़ा छल हो रहा है। यह छल खुद को साधु, योगी, संत और भगवाधारी कहने वाले व्यक्ति और उसकी पार्टी द्वारा किया जा रहा’।
प्रयागराज में माघ मेला छोड़ने के मसले पर शंकराचार्य ने कहा, ‘माफी मांगने का भी एक तरीका होता है, क्षमा याचना करनी पड़ती है। प्रशासन हमें लालच दे रहा था कि आप ऐसे नहा लीजिए, आपके ऊपर फूल बरसा देंगे। अगले साल के लिए चारों शंकराचार्यों के लिए प्रोटोकॉल बना देंगे, लेकिन हमने नकार दिया। हमने कहा कि जिन संन्यासियों पर आपने लाठी बरसाई, उनसे माफी मांगिए। अगर वे क्षमा कर दें, तो ठीक, लेकिन इस सब के लिए प्रशासन आगे नहीं आया’। गौरतलब है कि शुक्रवार को खबर आई थी कि मेला प्रशासन माफी मांग कर शंकराचार्य को संगम पर स्नान कराएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
