प्रयागराज। माघ मेले की मौनी अमावस्या को पुलिस द्वारा अपमान किए जाने के बाद धरने पर बैठे शकंराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अन्न और जल का त्याग कर दिया है। देर रात खबर लिखे जाने तक वे 30 घंटे से ज्यादा समय से अनशन पर बैठे थे। सरकार या प्रशासन की ओर से किसी ने उनकी सुध नहीं ली है। गौरतलब है कि पुलिस ने माघ मेले में उनकी पालकी रोक दी थी और उनको पैदल संगम तक जाने को कहा था। इसका विरोध करने पर उनके शिष्यों के साथ मारपीट हुई।
पालकी रोके जाने और शिष्यों से मारपीट के विरोध में उसी जगह पर शंकराचार्य धरने पर बैठे हैं, जहां पुलिस उन्हें छोड़ गई थी। वे अपने पंडाल में पूरी रात ठंड में धरने पर बैठे रहे। 30 घंटे से ज्यादा समय से अनाज का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया। पानी तक छोड़ दिया। शंकराचार्य ने सोमवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। उन्होंने कहा, ‘जब तक प्रशासन आकर माफी नहीं मांगता, तब तक हम अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। फुटपाथ पर ही रहेंगे’।
शंकराचार्य ने कहा, ‘शंकराचार्य जब भी इतिहास में स्नान करने गए हैं, पालकी में ही गए हैं। हर साल इसी पालकी में जाते रहे हैं’। उन्होंने कहा, ‘जब तक पुलिस प्रशासन सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, तब तक गंगा स्नान नहीं करूंगा। मैं प्रण लेता हूं कि हर मेले के लिए प्रयागराज आऊंगा, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं रहूंगा। फुटपाथ पर ही अपनी व्यवस्था करूंगा’। इससे पहले उनके मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया, ‘शंकराचार्य ने कल से कुछ भी नहीं खाया है। कोई प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने भी नहीं आया। सुबह अपनी पूजा और दंड तर्पण उसी स्थान पर किया’।
